नैनीताल: उत्तराखंड पेयजल अनुश्रवण समिति के उपाध्यक्ष दिनेश आर्या ने सोमवार को नैनीताल क्लब में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में विधायक सरिता आर्या, ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और पेयजल विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य विधानसभा क्षेत्र नैनीताल के विभिन्न गांवों में जल जीवन मिशन के तहत हो रहे कार्यों की समीक्षा और पेयजल समस्याओं का समाधान था।
बैठक के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गांवों में अधूरे निर्माण कार्यों, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों और जल आपूर्ति की अनियमितताओं की शिकायतें उपाध्यक्ष के समक्ष रखीं। कई गांवों से यह भी बताया गया कि कुछ स्थानों पर जल जीवन मिशन के कार्य अभी तक प्रारंभ ही नहीं हुए हैं।
इस पर उपाध्यक्ष दिनेश आर्या ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जो ठेकेदार समय पर कार्य पूरा नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि “हर व्यक्ति को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।” साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी और अधूरे कार्यों के पुनः टेंडर जल्द कराए जाएँ।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित पेयजल समस्याओं का 15 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित करें, जिसके बाद वे स्वयं समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही नैनीताल नगर की हाइड्रेंट लाइनों को दुरुस्त रखने और उनमें 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए, ताकि आग लगने जैसी आपात स्थिति में तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।
बैठक में भवाली में सीवरेज और पेयजल लाइनों के निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पटवाडांगर में एडीबी द्वारा बनाए जा रहे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में भी कार्यवाही तेज करने को कहा गया।
नैनीताल नगर में सीवर लाइनों से भवनों को अवैध रूप से जोड़े गए वर्षा जल निकास पर भी चर्चा हुई, जहां उपाध्यक्ष ने ऐसे भवनों को तुरंत चिह्नित कर चालान जारी करने और संयोजन हटाने के निर्देश दिए।
इसके अलावा भूमियाधर क्षेत्र में पेयजल समस्या के समाधान हेतु जल संस्थान को 10 दिन की समयसीमा दी गई। संबंधित ठेकेदार को पेनल्टी लगाने और कार्य पूरा न करने पर काली सूची में डालने का निर्देश दिया गया।
अंत में उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान जिन गांवों की पेयजल लाइनों को क्षति पहुंची है, उनके मरम्मत प्रस्ताव आपदा विभाग के माध्यम से तत्काल जिला अधिकारी कार्यालय को भेजे जाएं, और मरम्मत पूरी होने तक ग्रामीणों को वैकल्पिक व्यवस्था से जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी और पेयजल विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
