नैनीताल: मशहूर हिल स्टेशन नैनीताल, जो अपने खूबसूरत झीलों, शांत मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहचाना जाता है, अब सैलानियों की जेब पर पहले से कहीं ज़्यादा भारी पड़ने लगा है। कभी किफायती माने जाने वाले इस पर्यटन स्थल की सैर अब महंगी होती जा रही है।
पिछले कुछ महीनों में यहां लगातार शुल्कों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले टोल टैक्स में इजाफा किया गया, फिर पार्किंग शुल्क बढ़ा, और अब जी.बी. पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान (नैनीताल जू) की टिकट दरें भी बढ़ा दी गई हैं, जिससे आम पर्यटक परेशान हैं।
टोल और पार्किंग के बढ़े दाम
इस वर्ष नैनीताल में प्रवेश के लिए लिए जाने वाले टोल टैक्स को ₹110 से बढ़ाकर ₹300 कर दिया गया है। वहीं, वाहनों की पार्किंग फीस ₹150 से बढ़कर ₹500 तक पहुंच गई है। स्थानीय व्यापारियों और पर्यटकों दोनों का कहना है कि इन दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से पर्यटन पर सीधा असर पड़ेगा।
चिड़ियाघर के टिकट रेट भी बढ़े
अब इस बोझ में एक और इजाफा जुड़ गया है। नैनीताल जू की प्रवेश दरें भी 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई हैं। पहले भारतीय पर्यटकों के लिए टिकट ₹100 था, जिसे अब बढ़ाकर ₹150 प्रति व्यक्ति कर दिया गया है। विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट ₹200 से बढ़ाकर ₹300 प्रति व्यक्ति कर दिया गया है।
हालांकि, 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को फ्री एंट्री की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी।
प्रबंधन ने दी सफाई
वन क्षेत्राधिकारी आनंद लाल आर्य ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से पर्यटकों की संख्या में गिरावट और संचालन संबंधी चुनौतियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
उनके अनुसार, चिड़ियाघर के रखरखाव, पशुओं के आहार, सुरक्षा व्यवस्था और सफाई में बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए टिकट दरें बढ़ाना आवश्यक था।
आर्य ने यह भी बताया कि नैनीताल जू में रेड पांडा, मोनाल, मारखोर जैसे दुर्लभ और आकर्षक जीव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बढ़े हुए शुल्क से इन जानवरों के संरक्षण और जू की सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।
पर्यटकों की जेब पर बढ़ता दबाव–
हालांकि, आम सैलानी और स्थानीय गाइड्स का कहना है कि इन लगातार बढ़ते शुल्कों से पर्यटन का खर्च दोगुना होता जा रहा है। “पहले नैनीताल आना सुकून और सस्ते आनंद का प्रतीक था, लेकिन अब यहां घूमना लग्ज़री जैसा हो गया है,” एक पर्यटक ने कहा।
