उत्तराखंड: उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश के करीब 24 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) के तहत आयोग ने 50.28 करोड़ रुपये का समायोजन करने के निर्देश दिए हैं। इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को जनवरी 2026 के बिजली बिलों में दिखाई देगा।
दरअसल, अप्रैल से जून की तिमाही के लिए यूपीसीएल ने एफपीपीसीए से जुड़े आंकड़ों और गणना के आधार पर नियामक आयोग के समक्ष पिटीशन दाखिल की थी। आयोग ने जांच के बाद पाया कि इस अवधि में बिजली खरीद लागत अनुमान से कम रही, जिसके कारण 50.28 करोड़ रुपये का नकारात्मक एफपीपीसीए स्वीकृत किया गया है। यह पूरी राशि उपभोक्ताओं को राहत के रूप में वापस मिलेगी।
आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यूपीसीएल अब से दो महीने बाद उपभोक्ताओं से एफपीपीसीए की वसूली करेगा। उदाहरण के तौर पर, अप्रैल माह का एफपीपीसीए जून की खपत पर लागू होगा, जिसकी बिलिंग जुलाई में की जाएगी।
उद्योग उपभोक्ताओं की मांग पर आयोग ने यूपीसीएल को निर्देश दिया है कि हर महीने लागू होने वाले एफपीपीसीए के आंकड़े पिछले महीने की 28 तारीख तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएँ।
औसत बिजली खरीद दर 5.39 रुपये प्रति यूनिट
नियामक आयोग ने यूपीसीएल की ओर से बताई गई स्वीकृत औसत बिजली खरीद दर 5.39 रुपये प्रति यूनिट को स्वीकार कर लिया है। आयोग ने कहा कि यूपीसीएल के बिजली खरीद आंकड़े समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं, इसलिए आवश्यकतानुसार इन्हें आने वाले महीनों में एफपीपीसीए में समायोजित करना उचित प्रक्रिया है।
यूपीसीएल ने आयोग को बताया कि इस तिमाही में उनसे 27.28 करोड़ रुपये की अधिक वसूली हुई है। चूंकि संबंधित महीनों के ऑडिटेड रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए आयोग ने फिलहाल इस राशि को आगे की तिमाहियों में समायोजित करने की अनुमति दी है। ऊर्जा निगम को इसका अलग रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आयोग द्वारा की गई पूरी गणना और विश्लेषण के आधार पर लिया गया यह निर्णय जनवरी के बिलों में उपभोक्ताओं को राहत के रूप में दिखाई देगा।
50 करोड़ की छूट जनवरी के बिलों में साफ दिखेगी। इससे उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा।
— नीरज सती, सचिव, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग
