International NEWS: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के 40वें दिन हालात में बड़ा मोड़ देखने को मिला है। लंबे समय से जारी हमलों और तीखी बयानबाजी के बीच अब दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बनने की खबर सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने यह ऐलान करते हुए कहा कि तय समय सीमा खत्म होने से ठीक पहले यह फैसला लिया गया, ताकि हालात और ज्यादा बिगड़ने से रोके जा सकें।
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उनकी पहल पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और अंततः सीजफायर पर सहमति बनी। हालांकि, इस समझौते को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आ रहे हैं।
इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कहा है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि सीजफायर से पहले इजराइली सेना ने ईरान के कई अहम ठिकानों, जैसे पुल और रेलवे नेटवर्क को निशाना बनाया, जिन्हें सैन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
वहीं ईरान की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिला। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनके हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो वे क्षेत्र में तेल और गैस आपूर्ति पर असर डाल सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि देश की बड़ी आबादी जरूरत पड़ने पर युद्ध के लिए तैयार है।
सीजफायर की घोषणा के बाद ईरान और इराक के कुछ हिस्सों में लोगों ने राहत की सांस लेते हुए जश्न भी मनाया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही है, क्योंकि कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र में भी हलचल तेज रही। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लाए गए प्रस्ताव पर Russia और China ने वीटो कर दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव और कूटनीतिक गतिविधियां और बढ़ गई हैं।
फिलहाल, दो हफ्तों के इस सीजफायर को आगे बढ़ाने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह युद्धविराम स्थायी शांति की दिशा में कदम बनता है या फिर हालात दोबारा बिगड़ते हैं।
