आगरा: शनिवार को आगरा के आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-7 में एक भयानक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। तेज़ धमाके की आवाज़, धूल का गुबार और कुछ ही पलों में ज़मीन पर समा गईं पांच दुकानें। एक तरफ लोगों को लगा जैसे भूकंप आया हो, तो किसी ने समझा बम फट गया है। लेकिन असलियत और भी डरावनी थी — दुकानों के ढहते ही मलबे में कई जिंदगियां दब गईं।

जिस समय हादसा हुआ, इलाके में रोज़ की तरह रौनक थी। कोई दुकान से सामान ले रहा था, कोई काम कर रहा था। लेकिन दोपहर 3:30 बजे जैसे ही दुकानों के बीच की दीवार तोड़ने का काम चल रहा था, पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। हादसे में दो सगे भाइयों किशनचंद (65) और विष्णु उपाध्याय (60) की मौत हो गई, जबकि सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, इतनी तेज़ आवाज़ हुई कि लोग अपने घरों और फ्लैटों से बाहर की ओर भागे। सामने एटा कॉम्प्लेक्स में बैठे दुकानदारों को लगा बम फट गया। चारों ओर अफरा-तफरी मच गई।

भीड़, चीख-पुकार और टूटते ख्वाब
धमाके के तुरंत बाद चारों ओर धूल का गुबार फैल गया। दुकानों के बाहर खड़े लोग, आसपास के फ्लैटों में रहने वाले सभी घबराकर बाहर आ गए। कोई समझ नहीं पाया कि आखिर हुआ क्या है। लेकिन जब धूल छटी तो दिखा — पांच दुकानें ज़मीन में तब्दील हो चुकी थीं। इन दुकानों में दुकान मालिक, ग्राहक और मजदूर काम कर रहे थे, जो सभी मलबे में दब गए।

रेस्क्यू ऑपरेशन: बहादुरी की मिसाल
तीन घंटे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस, स्थानीय लोग, नगर निगम की टीम और फायर ब्रिगेड ने मोर्चा संभाला। जेसीबी की मदद से मलबा हटाया गया। एक मजदूर के दोनों पैर लोहे की जाली में फंसे थे, जिसे निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान इंस्पेक्टर आनंदवीर सिंह खुद भी घायल हो गए। शाम साढ़े छह बजे तक चलाए गए इस ऑपरेशन के बाद सात लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।

मौके पर पहुंचे बड़े नेता और अफसर
घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, पार्षद गौरव शर्मा और डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी समेत कई आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे।
एक साल पहले भी गिर चुकी है दुकान
गौर करने वाली बात ये है कि इसी कॉलोनी में एक साल पहले भी सेक्टर-12 की शराब की दुकान भरभराकर गिर गई थी, तब बारिश को जिम्मेदार बताया गया था।

लापरवाही या हादसा?
हादसे के वक्त शराब की दुकान बंद हो चुकी थी, और दुकान का दायरा बढ़ाने के लिए दीवार तोड़ी जा रही थी। लेकिन क्या उचित सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे? क्या यह महज़ हादसा है या किसी की घोर लापरवाही?
जो लोग दबे थे मलबे में:
अर्जुन (मजदूर, मध्य प्रदेश)
ब्रजेश शर्मा (दुकानदार)
दीपक सेन (ग्राहक, सेक्टर-8)
अजय चहर (बीधा नगर)
सोनू (ताजगंज)
किशन व विष्णु उपाध्याय (मालिक, मृतक)
पुष्कर उपाध्याय
