देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 15–16 सितंबर की रात आई आपदा ने सब कुछ उजाड़कर रख दिया। इस भीषण त्रासदी में अब तक 24 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 16 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कुदरत के इस कहर ने देहरादून सहित पूरे प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं, जिन्हें भरने में सालों लग सकते हैं।
मॉनसून अपने आखिरी दौर में उत्तराखंड को सबसे बड़ा दर्द दे गया। इस बार शायद ही कोई जिला हो, जो इसकी मार से अछूता रहा हो। राजधानी देहरादून में पहली बार ऐसा रौद्र रूप देखने को मिला, जिसने प्रशासन और लोगों दोनों को हिला दिया। केवल 24 घंटे में 24 लोगों की जान चली गई, जबकि कई घर और परिवार तबाह हो गए।
रेस्क्यू टीमें लगातार मलबा हटाने और फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। अब तक कई शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन 16 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं है। राजधानी में हालात इतने बिगड़े कि जनजीवन पूरी तरह थम गया।
सैलाब और भूस्खलन ने सड़कों को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। प्रेमनगर के पास पांवटा साहिब हाईवे का पुल टूटने से हिमाचल का संपर्क कट गया, जबकि देहरादून-मसूरी रोड जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया। लालतप्पड़ स्थित हरिद्वार-देहरादून हाईवे भी क्षतिग्रस्त हुआ, जिसे फिलहाल आंशिक रूप से खोला गया है। सहस्त्रधारा और मालदेवता इलाकों में भी हालात भयावह बने हुए हैं।
इधर, जौनसार बावर की लाइफलाइन कहे जाने वाले कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर भारी भूस्खलन के चलते यातायात पूरी तरह बंद हो गया है। मार्ग बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं और लोग घंटों फंसे हुए हैं।
