नैनीताल: राजस्व अभिलेखीय कार्यों को निजी व्यक्ति से कराए जाने के गंभीर मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। ललित मोहन रयाल ने विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद दो निलंबित रजिस्ट्रार कानूनगो को पदावनत कर दिया है।
प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार रजिस्ट्रार कानूनगो भूपेश चंद और अर्जुन सिंह बिष्ट पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद से जुड़े वैधानिक दायित्वों को निजी और अनधिकृत व्यक्तियों से संपादित कराया। मामले को गंभीर मानते हुए नियमानुसार प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में दस्तावेजी साक्ष्यों, अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर यह तथ्य स्थापित हुआ कि दोनों कार्मिकों ने राजस्व से जुड़े कार्यों में निजी व्यक्ति की सहायता ली थी। जांच रिपोर्ट में इन आरोपों को पूर्ण रूप से सिद्ध माना गया।
कारण बताओ नोटिस के जवाब में दोनों कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि अधिक कार्यभार और लंबित मामलों के दबाव के कारण उन्होंने निजी व्यक्ति की मदद ली थी। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में कार्यभार का दबाव वैधानिक शक्तियों के हस्तांतरण को उचित नहीं ठहरा सकता। राजस्व अभिलेखीय कार्यों में निजी व्यक्ति को शामिल करना नियमों के विरुद्ध है और इससे सरकारी अभिलेखों की गोपनीयता व विश्वसनीयता पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
प्रशासन ने इस कृत्य को गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और राजकीय शक्तियों के अवैध हस्तांतरण की श्रेणी में माना। दंड निर्धारित करते समय पद की संवेदनशीलता, कृत्य की गंभीरता और अधिकारियों द्वारा तथ्य स्वीकार किए जाने जैसे पहलुओं पर भी विचार किया गया।
इन परिस्थितियों में जिला प्रशासन ने दोनों कार्मिकों को उनके वर्तमान पद से पदावनत करते हुए निम्न पद और वेतनमान पर नियुक्त किए जाने का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार यह दंड तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश किसी अलग आपराधिक या विजिलेंस जांच को प्रभावित नहीं करेगा।
