देहरादून: राज्य सरकार ने बड़े प्रशासनिक निर्णय के तहत देहरादून और नैनीताल स्थित राजभवनों का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया है।
25 नवंबर 2025 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की मंज़ूरी के पश्चात जारी अधिसूचना में बताया गया कि अब सभी आधिकारिक दस्तावेजों तथा सरकारी उपयोग में ‘राजभवन’ के स्थान पर ‘लोक भवन’ नाम का प्रयोग किया जाएगा। राज्यपाल सचिव रविनाथ रमन ने इसकी आधिकारिक सूचना जारी कर दी है।
ब्रिटिश काल में निर्मित नैनीताल राजभवन, जो अब ‘लोक भवन’ कहलाएगा, 126वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इसकी नींव 27 अप्रैल 1897 को रखी गई थी और मार्च 1900 में इसकी पूरी इमारत तैयार हुई थी। पश्चिमी गौथिक शैली में E आकार में बनी यह इमारत ब्रिटिश गवर्नर सर एंटनी पैट्रिक मैकडोनाल्ड की देखरेख में बनी थी।
कुछ समय पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसके 125 वर्ष पूरे होने पर नैनीताल लोक भवन का दौरा किया था और परिसर के ऐतिहासिक महत्व को समझा था।
ब्रिटिश शासन के समय दिल्ली को प्रशासनिक राजधानी और शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया था। इसी प्रकार अवध के लिए लखनऊ मुख्यालय बना, जबकि नैनीताल को उसकी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया।
नैनीताल में पहला राजभवन वर्ष 1862 में रैमजे अस्पताल परिसर में स्थापित हुआ था। 1865 में यह माल्डन हाउस में स्थानांतरित हुआ और 1875 में स्नो व्यू क्षेत्र में बना। लेकिन भूस्खलन के खतरे के कारण इसे पुनः स्थानांतरित कर 1897 में वर्तमान स्थान पर स्थायी रूप से निर्माण कराया गया।
करीब 160 एकड़ घने जंगल से घिरे इस परिसर में ब्रिटिश काल के दौरान 1925 में 75 एकड़ क्षेत्र में एशिया का सबसे ऊँचा और अत्यंत प्रतिष्ठित गोल्फ कोर्स भी विकसित किया गया। यह परिसर लंबे समय तक जनता और पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित रहा, लेकिन 1994 में पहली बार इसे आम लोगों के दर्शनों के लिए खोला गया।
देहरादून स्थित राजभवन का नाम भी अब आधिकारिक रूप से लोक भवन हो गया है। देहरादून और नैनीताल, दोनों राजभवन अब इसी नए नाम से सरकारी अभिलेखों और पहचान में दर्ज रहेंगे।

