नैनीताल में 3 जनवरी की रात को साल 2026 का पहला सुपरमून देखने को मिला। यह चांद सामान्य पूर्णिमा की तुलना में आकार में काफी बड़ा और अधिक चमकदार नजर आया, जिससे रात का आकाश खास आभा से जगमगा उठा। नए साल की शुरुआत खगोलीय दृष्टि से बेहद खास रही।
दरअसल, सुपरमून उस स्थिति को कहा जाता है जब पूर्णिमा के दौरान चांद अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु यानी पेरीजी के पास होता है। इसी कारण चांद पृथ्वी से अपेक्षाकृत कम दूरी पर दिखाई देता है और सामान्य से बड़ा नजर आता है। 3 जनवरी को चांद पृथ्वी से करीब 3 लाख 62 हजार किलोमीटर की दूरी पर था। इस वजह से यह चांद सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत बड़ा और करीब 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई दिया।
वुल्फमून और आइसमून के नाम से भी जाना जाता है यह पूर्णिमा
3 जनवरी को दिखाई देने वाली इस पूर्णिमा को अलग-अलग संस्कृतियों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। इनमें सबसे प्रचलित नाम वुल्फमून है। उत्तर अमेरिका और यूरोप में जनवरी की कड़ाके की ठंड के दौरान जंगलों के आसपास भेड़ियों के झुंड निकल आते थे। भोजन की कमी और सर्द मौसम के कारण भेड़ियों की आवाजें अधिक सुनाई देती थीं, इसी कारण जनवरी की पूर्णिमा को वुल्फमून कहा गया।
वहीं, उत्तरी गोलार्ध में जनवरी का महीना अत्यधिक ठंडा होता है। इस दौरान कई जगह झीलें, नदियां और जलाशय बर्फ से जम जाते हैं। इसी वजह से इस पूर्णिमा को आइसमून भी कहा जाता है।
