हल्द्वानी: शहर में डेमोग्राफी चेंज जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। तहसीलदार कुलदीप पांडे की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र तैयार कर जनसंख्या आँकड़ों में हेरफेर करने की गहरी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। नैनीताल पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है।
गिरफ्तार आरोपी — मो. फैजान निवासी नई बस्ती बनभूलपुरा, रईस अहमद निवासी नई बस्ती बनभूलपुरा, दिनेश सिंह दासपा (UPCL कर्मचारी, T.G. Technical Grade Second) काठगोदाम।
कैसे चलता था फर्जीवाड़े का खेल खुलासा- रईस अहमद ने माना कि उसने जानबूझकर गलत कागजात दिए और आर्थिक लाभ देकर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराया। इसी नकली प्रमाणपत्र के आधार पर उसने अपना विवाह प्रमाणपत्र भी बनवा लिया। UPCL कर्मचारी दिनेश सिंह दासपा इस गैंग को 15 साल पुराने बिजली कनेक्शनों का डेटा और बिलों की प्रमाणित प्रतियां निकालकर देता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह प्रति बिल ₹500 लेता था। यही दस्तावेज फर्जी निवास प्रमाणपत्र तैयार करने में “मुख्य सबूत” की तरह उपयोग किए जाते थे। फैजान और रईस अहमद पर BNS की धारा 318(4), 316(5), 336(3), 338, 61(2) के तहत साक्ष्य मिले हैं। UPCL कर्मचारी दिनेश के खिलाफ धारा 318(4), 61(2) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है। SSP नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के निर्देशन में की गई यह कार्रवाई फर्जी प्रमाणपत्र माफिया के लिए बड़ा झटका है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि जनसंख्या आँकड़ों में हेरफेर की किसी भी कोशिश को सख्ती से कुचला जाएगा। हल्द्वानी में जनसांख्यिकी बदलने की यह सुनियोजित कोशिश उजागर होने के साथ इसे कानून व्यवस्था की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
फैजान ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने रईस अहमद के नाम पर झूठे दस्तावेज तैयार कर फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया। रईस की बेटी इल्मा के जाति प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसने पूरे फर्जी कागज तैयार किए। फैजान ने कई अन्य लोगों के लिए भी इस तरह के प्रमाणपत्र बनाने की बात कबूल की।
