नैनीताल: उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रतिष्ठित माँ नन्दा देवी महोत्सव आज ब्रह्ममुहूर्त में विधि-विधान और पूजाअर्चना के साथ आरंभ हुआ। सुबह से ही श्रद्धालु रिमझिम बारिश के बीच जय माँ नन्दा-सुनन्दा के जयकारों के साथ मंदिर प्रांगण पहुँचे और माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
बीती 29 अगस्त को भक्तों की टोली परंपरानुसार मूर्ति निर्माण हेतु कदली वृक्ष लेने के लिए विधिवत रवाना हुई थी। कदली वृक्ष लाए जाने के बाद कुशल कलाकारों ने माता नन्दा और सुनन्दा की प्रतिमाएँ बनाई। आज ब्रह्ममुहूर्त में उनकी प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई और दर्शन के लिए द्वार खोल दिए गए।
राम सेवक सभा के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिमाओं को पूर्णतः ईको-फ्रेंडली सामग्री से तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए माँ नन्दा-सुनन्दा की प्रतिमाएँ 5 सितंबर तक दर्शन हेतु उपलब्ध रहेंगी। इसके उपरांत माता की भव्य नगर परिक्रमा कराई जाएगी और परंपरा के अनुसार प्रतिमाओं का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा।
मंदिर के पुजारी भगवत प्रसाद जोशी ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है।
