नैनीताल: डिजिटल इंडिया, सपनों का भारत, डबल इंजन की सरकार यह सब बेअसर है पहाड़ों के उन इलाकों में जहाँ सरकार की नज़र नहीं पहुंच पाती, ना हीं पहुंच पता है विकास , अगर कुछ पहुंच पाता है तो वो है सिर्फ बेबसी और मजबूरी जिस से दशकों से लड़ते आ रहे है पहाड़ के लोग।
ताज़ा मामला है नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के महतोली व उसके आस पास के गाँव जो सड़क से मिलों दूर है। यहाँ के गाव के नजदीक का मोटर मार्ग भी कई किलोमीटर दूर है, और ग्रामीणों को घनघोर जंगल ऊंचे नीचे रास्ते और से होकर मुख्य मोटर मार्ग तक पहुंचते है।
लेकिन हालात तब मुश्किल हो जाते है जब किसी बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिला, बूढ़े लोगों को अस्पताल तक ले जाना होता है, ऐसे में ग्रामीण कभी डोली कभी कुर्सी में लकड़ी फ़सा कर किसी तरह सड़क तक ले जाना पड़ता है। अब तो हालात ये है कि गाँव के युवा भी रोजगार के लिए गाँव छोड़ चुके है ऐसे मे किसी को कंधो का सहारा मिलना भी कभी मुश्किल हो जाता है।
रोज की तरह आज भी महतोली गांव में मुश्किल का सामना करना पड़ा गाँव की एक आमा बीमार थी उन्हे तत्काल डॉक्टर को दिखाने की जरूरत थी। आमा को अस्पताल ले जाने को युवाओं ने दमखम दिखाया एक कुर्सी में लकड़ियों के सहारे से डोली बनायीं और बीमार बुजुर्ग महिला को किसी तरह अस्पताल ले जाया गया। जिसके बाद बीमार महिला को इलाज मिला।
यह एक पहली घटना नहीं है, या सिर्फ नैनीताल जिले के गांव का हाल नहीं है, प्रदेश के अलग अलग जिलों से हर रोज ऐसी घटनाये सामने आती है जिन्हे देख कर लगता है आखिर यही है क्या डिजिटल इंडिया और पूछते है क्या यही है डबल इंजन का विकास.
