देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी की भूमिका उजागर करने की मांग को लेकर शनिवार को देहरादून में महापंचायत आयोजित की गई। परेड मैदान में संयुक्त संघर्ष मंच और कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में जुटे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों के नाम सामने नहीं आते और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
महापंचायत में अंकिता भंडारी के माता-पिता भी मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर पीड़ित परिवार के प्रति समर्थन जताया। इस दौरान मंच से वक्ताओं ने जांच को लेकर सवाल उठाए और न्याय में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की।
महापंचायत में तीन अहम प्रस्ताव पारित किए गए। पहला, यदि 15 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार की शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं होती तो दोबारा महापंचायत कर राष्ट्रपति से मुलाकात की जाएगी। दूसरा, अंकिता के माता-पिता द्वारा दिया गया शिकायती पत्र ही सीबीआई जांच का आधार माना जाए। तीसरा, मामले में नाम आने पर संबंधित भाजपा नेता को जांच के दायरे में लाकर पार्टी से निष्कासित किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई तब तक लड़ी जाएगी, जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती और सभी दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती।
