नैनीताल: नववर्ष के अवसर पर 01 और 02 जनवरी 2026 को श्री कैंची धाम में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है। श्रद्धालुओं की सुविधा और यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए अलग-अलग मार्गों और पार्किंग स्थलों का निर्धारण किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि निर्धारित व्यवस्था का पालन न करने पर सख्ती की जाएगी।
निर्धारित यातायात व्यवस्था इस प्रकार रहेगी
हल्द्वानी और काठगोदाम की ओर से कैंची धाम दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन रानीबाग से भीमताल रोड होते हुए भीमताल विकास भवन पार्किंग में खड़े करेंगे। यहां से शटल सेवा के माध्यम से श्रद्धालुओं को कैंची धाम भेजा जाएगा।
हल्द्वानी और काठगोदाम से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले सभी वाहन रानीबाग से भीमताल, खुटानी बैण्ड होते हुए मुक्तेश्वर रोड से अपने गंतव्य की ओर जाएंगे।
नैनीताल और ज्योलिकोट मार्ग से कैंची धाम आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन सेनेटोरियम पार्किंग में पार्क करेंगे और शटल सेवा से दर्शन के लिए जाएंगे। वहीं, नैनीताल-ज्योलिकोट मार्ग से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहन मस्जिद तिराहा-नैनीबैण्ड से बाईपास होकर नैनीबैण्ड, तिरछाखेत, शेख, खुटानी मार्ग से गुजरेंगे।
अल्मोड़ा और रानीखेत की ओर से कैंची धाम आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन गरमपानी में पार्क करेंगे और शटल सेवा से मनीराम ढाबा तक जाएंगे। अल्मोड़ा और रानीखेत से मैदानी क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहन क्वारब-रामगढ़ मार्ग और बेतालघाट मार्ग का उपयोग करेंगे।
काठगोदाम से कैंची धाम के लिए टैक्सी दोपहिया वाहन और पर्यटक दोपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जनपद के स्थानीय निवासी यदि व्यक्तिगत दोपहिया वाहन से दर्शन के लिए जाएंगे तो उन्हें भवाली रोडवेज पार्किंग या नगर पालिका पार्किंग में वाहन खड़ा कर शटल सेवा का उपयोग करना होगा।
भीमताल, भवाली और खैरना से कैंची धाम के लिए केवल शटल वाहनों का ही संचालन रहेगा। यदि भीमताल और भवाली क्षेत्र की पार्किंग 80 प्रतिशत तक भर जाती है तो हल्द्वानी और काठगोदाम से ऊपर की ओर पर्यटक वाहनों का प्रवेश रोक दिया जाएगा। इसके साथ ही आवश्यक सेवाओं से जुड़े मालवाहक वाहनों का भी भवाली से खैरना तक आवागमन प्रतिबंधित रहेगा।
प्रशासन और पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले यातायात योजना की जानकारी जरूर लें और सहयोग करें, ताकि दर्शन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सकें।
