पटना, 17 अक्टूबर। नेपाल के जनकपुर से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकली साइकिल यात्रा शनिवार को पटना पहुँची। पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में पहुँचे 12 सदस्यीय दल से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकात की। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक में बिहार में सकल पर्यावरण उत्पाद (Gross Environment Product—GEP) लागू करने का सुझाव दिया गया, ताकि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण को भी महत्व दिया जा सके।
बाढ़ के पानी का बेहतर उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को देगा मजबूती
पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि बिहार में बाढ़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के बीच जल संसाधनों के सदुपयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं। बाढ़ के पानी का उपयोग मत्स्य पालन, मखाने की खेती और सिंचाई के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिक जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण को विकास योजनाओं में मिले प्राथमिकता: गितांशु जोशी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व संगठन मंत्री एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष गितांशु जोशी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी समस्याएँ लगातार गंभीर होती जा रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना आवश्यक है।
गितांशु जोशी ने कहा कि विकास योजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जल संरक्षण, नदियों एवं तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को सरकारी योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को जनजागरूकता बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकृति को नुकसान पहुँचाकर हासिल किया गया विकास स्थायी नहीं हो सकता। आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व देना आज की आवश्यकता है।
GEP से विकास के साथ पर्यावरण का भी होगा आकलन
बैठक में बिहार में सकल पर्यावरण उत्पाद (GEP) लागू करने का सुझाव प्रमुखता से सामने आया। इसके तहत आर्थिक विकास के आकलन में जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति को भी शामिल करने पर जोर दिया गया। इससे पर्यावरण संरक्षण को नीतिगत निर्णयों और विकास योजनाओं में अधिक प्रभावी स्थान मिल सकता है।
नेपाल के जनकपुर से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता और प्रकृति के साथ संतुलित विकास का संदेश दे रही है। पटना में हुई इस मुलाकात के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी और नीतिगत प्रयासों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।



