उत्तराखंड: प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने की अपील से नाराज ज्वेलर्स, देहरादून समेत कई शहरों में प्रदर्शन का ऐलान
देहरादून: सर्राफा कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने और प्रधानमंत्री द्वारा एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद अब उत्तराखंड के ज्वेलर्स में नाराजगी बढ़ गई है। इसी के विरोध में 14 मई को पूरे प्रदेश में सांकेतिक प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है। राजधानी देहरादून समेत कई शहरों में व्यापारी शाम के समय मोमबत्ती जलाकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। देहरादून के धामावाला स्थित सर्राफा बाजार में शाम 7 बजे व्यापारी एकत्र होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार के हालिया फैसलों और सार्वजनिक बयानों का सीधा असर सोने के बाजार पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जब देश के सर्वोच्च स्तर से लोगों से सोना न खरीदने की अपील की जाती है तो इसका असर ग्राहकों की सोच पर पड़ता है और लोग खरीदारी टालने लगते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान छोटे ज्वेलर्स, पारंपरिक दुकानदारों और इस कारोबार से जुड़े कारीगरों को उठाना पड़ सकता है।
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सर्राफा व्यापारियों ने कहा कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि परंपरा, संस्कृति और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन, अक्षय तृतीया, धनतेरस और दीपावली जैसे अवसरों पर सोने-चांदी की खरीद को शुभ माना जाता है। ऐसे में लोगों को लंबे समय तक सोना न खरीदने का संदेश देना इस पूरे व्यापारिक तंत्र पर सीधा असर डाल सकता है।
व्यापारिक संगठनों ने सरकार के उस फैसले पर भी नाराजगी जताई है जिसमें सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। उनका कहना है कि पहले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम ऊंचे हैं, ऊपर से आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतें और बढ़ गई हैं। नतीजा यह है कि ग्राहक खरीदारी से दूरी बना रहे हैं और बाजार में सुस्ती दिखाई देने लगी है।
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व्यापारियों ने कहा कि इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। आभूषण निर्माण से जुड़े हजारों कारीगर और उनके परिवार भी इस संकट की चपेट में आ सकते हैं, क्योंकि उनका रोजगार रोज मिलने वाले ऑर्डर पर टिका होता है। मांग घटने का सीधा असर उनकी आय और रोजगार पर पड़ेगा।
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सर्राफा संगठनों ने याद दिलाया कि इससे पहले भी टैक्स नीतियों के विरोध में देशभर के ज्वेलर्स लंबे समय तक आंदोलन कर चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार को इस उद्योग की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए, क्योंकि स्वर्ण कारोबार देश की अर्थव्यवस्था और राजस्व में भी अहम योगदान देता है।
उत्तराखंड के व्यापारियों ने देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी समेत सभी जिलों के सर्राफा व्यापारियों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। साथ ही केंद्र सरकार से मांग की गई है कि सोने पर बढ़ाए गए आयात शुल्क पर दोबारा विचार किया जाए और ऐसे संदेशों से बचा जाए जिनका असर सीधे लाखों परिवारों की आजीविका पर पड़े।
