नैनीताल: ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी से एक किशोर और महिला की मौत के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण शुरू कर दिया है। सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ ज्योलीकोट पहुंचे और ग्रामीणों से बीमारी तथा पेयजल व्यवस्था की स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में बीमारी फैलने के लिए दूषित पेयजल और जल संस्थान की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हुए अधिकारियों के सामने नाराजगी जताई। लोगों ने आरोप लगाया कि बीमारी के मामले सामने आने के बावजूद समस्या को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि क्षेत्र में लगातार लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य टीमों के गांव तक नहीं पहुंचने और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी की।
लोगों का कहना था कि यदि समय रहते पेयजल स्रोतों की जांच कर दूषित पानी की समस्या पर प्रभावी रोकथाम की जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। ग्रामीणों ने पेयजल स्रोतों की तत्काल जांच, पर्याप्त क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी की मांग की। इसके साथ ही गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाने, पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी अधिकारियों के सामने रखी गई।
निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने जल संस्थान के अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई, पेयजल स्रोतों की जांच और क्लोरीनेशन समेत अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग से क्षेत्र में अब तक सामने आए मरीजों की संख्या, उनके उपचार और विभाग की ओर से उठाए गए कदमों का विवरण भी मांगा गया।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केवल निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दूषित पानी के स्रोत की पहचान कर स्थायी समाधान करना जरूरी है। ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में बीमारी के मामले बढ़ने के बीच रविवार को एक महिला और एक किशोर की मौत ने चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग अब साफ पेयजल, नियमित स्वास्थ्य जांच और बीमारी की रोकथाम के लिए ठोस कार्रवाई की है। लोगों का कहना है कि प्रभावित गांवों में घर-घर स्वास्थ्य जांच और पानी के नमूनों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि करने, पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित बनाने और प्रभावित लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी विभागीय स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।

