उत्तराखंड हाईकोर्ट (नैनीताल)
नैनीताल: ज्योलिकोट क्षेत्र और इसके आसपास के गांवों में जलजनित बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गांजा, वीर भट्टी, छीना, बेलुवखान और सरियातल क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से डायरिया और पीलिया के मामले सामने आने तथा दो लोगों की मौत के मामले में जनहित याचिका दायर की गई है।
बेलुवखान निवासी रवि बिष्ट की ओर से दाखिल जनहित याचिका में प्रभावित ग्रामीणों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने और साफ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिका में क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने और अस्पतालों में भर्ती होने का भी उल्लेख किया गया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में हुई। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए अदालत ने नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक और उत्तराखंड पेयजल निगम के कुमाऊं मंडल मुख्य अभियंता को 8 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए है।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों से बीमारी की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराने की व्यवस्था की जानकारी मांगी है। साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए पूरी कार्य योजना के साथ अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है।
अदालत ने उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को प्रभावित गांवों में तत्काल स्वच्छ और दुष्णमुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये है। हाइकोर्ट के इस रुख के बाद अब संबंधित विभागों की कार्रवाई और जिम्मेदारी पर निगाहें टिकी है।

