गोपेश्वर (चमोली): उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में हुए हादसे ने एक बार फिर सिलक्यारा सुरंग हादसे की याद ताजा कर दी है। अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम भारी भूस्खलन के बाद मलबा भर गया। हादसे के समय सुरंग के अंदर 28 श्रमिक काम कर रहे थे।
हादसे के बाद शुरू किए गए राहत और बचाव अभियान में अब तक सात श्रमिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं 12 श्रमिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।
जानकारी के अनुसार, सुरंग के अंदर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ और पानी के साथ भारी मलबा सुरंग के भीतर भरने लगा। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए।
सुरंग में काम कर रहे अधिकांश श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं। सुरंग के अंदर फंसे और लापता श्रमिकों तक पहुंचने के लिए मलबा हटाने का काम लगातार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने सुरंग के अंदर जाकर राहत-बचाव अभियान की स्थिति देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री जिला अस्पताल जाकर घायल श्रमिकों से मुलाकात करेंगे और अधिकारियों के साथ बचाव अभियान की समीक्षा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी तरह की कमी नहीं रहने देने और जरूरत के अनुसार हरसंभव संसाधन जुटाने के निर्देश दिए हैं।
चमोली जिले में अगस्त के महीने में यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले 10 अगस्त को तमक क्षेत्र में बादल फटने की घटना में भारी नुकसान हुआ था। उस हादसे में बीआरओ का एक कर्मचारी लापता बताया गया था। अब चार दिन बाद विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना की सुरंग में हुए हादसे से जिले में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सुरंग में फंसे और लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। राहत-बचाव दल लगातार अभियान में जुटे हुए हैं।

