देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अग्निवीरों के भविष्य और शहीद सैनिकों के सम्मान से जुड़े दो अहम फैसलों को मंजूरी दी गई है। सरकार अब सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए अग्निवीर रोजगार सेल बनाएगी। इसके साथ ही शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है।
कैबिनेट ने सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित रोजगार सेल गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार के मुताबिक, इस सेल का उद्देश्य अग्निवीरों को उनकी योग्यता, प्रशिक्षण और कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना होगा।
सेल के जरिए अग्निवीरों को सरकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने इस फैसले को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित सेल गठित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि भारतीय सेना में सेवा देने वाले युवाओं के भविष्य को लेकर पहले से व्यवस्था तैयार करना जरूरी है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के अनुसार, उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य प्रदेश है और बड़ी संख्या में युवा अग्निवीर योजना के तहत सेना में सेवाएं दे रहे हैं। निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद जब ये युवा वापस लौटेंगे, तब उनके सामने रोजगार और भविष्य की नई चुनौतियां होंगी।
उन्होंने बताया कि रोजगार सेल केवल नौकरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा। अग्निवीरों के प्रशिक्षण और क्षमताओं का राज्य के विकास में किस तरह उपयोग किया जा सकता है, इस पर भी काम किया जाएगा।
सरकार की विभिन्न योजनाओं में अग्निवीरों को शामिल करने, अलग-अलग विभागों में उनके लिए अवसर तलाशने और उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह सेल काम करेगा।
कैबिनेट ने सैनिकों और शहीदों के सम्मान से जुड़ा एक और फैसला लिया है। अब देश की सेवा करते हुए शहीद होने वाले सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में युवा सेना में सेवा देते हैं और कई सैनिक देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देते हैं। लंबे समय से मांग थी कि शहीद सैनिकों को उनके पैतृक गांव में सम्मान दिया जाए और उनकी स्मृति को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाए।
सरकार का मानना है कि शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं उनके गांवों में स्थापित होने से उनके परिवार और ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान होगा। साथ ही इससे आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बलिदान और राष्ट्रसेवा से प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने दोनों फैसलों को वीर सैनिकों, अग्निवीरों और उनके परिवारों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी और सम्मान से जोड़कर देखा है।
उत्तराखंड की सैन्य पृष्ठभूमि को देखते हुए कैबिनेट के इन फैसलों को सैनिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक ओर सरकार अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के बाद उनके रोजगार और पुनर्वास के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करेगी, वहीं दूसरी ओर शहीद सैनिकों को उनके पैतृक गांव में सम्मान देने की व्यवस्था को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

