काठगोदाम-ज्योलिकोट से कैंची तक बनेगा रोपवे
हल्द्वानी: कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए काठगोदाम-नैनीताल रोपवे परियोजना के दायरे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। अब प्रस्तावित रोपवे को काठगोदाम और ज्योलिकोट से कैंची धाम तक ले जाने पर कवायद शुरू हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले नौ महीने में करीब 50 लाख श्रद्धालु कैंची धाम पहुंच चुके हैं। ऐसे में पर्वतीय सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए रोपवे को एक वैकल्पिक परिवहन साधन के तौर पर विकसित करने पर जोर है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बुधवार को सर्किट हाउस में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में रोपवे परियोजना के विस्तार और इससे जुड़े तकनीकी व भूमि संबंधी पहलुओं पर चर्चा की गई। इसके बाद अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन और रानीबाग क्षेत्र का भी निरीक्षण किया।
काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित 14.9 किलोमीटर लंबे रोपवे को लेकर वर्ष 2018 से सर्वे का काम चल रहा है। इसकी अनुमानित लागत 2721.52 करोड़ रुपये बताई गई है। अब योजना का दायरा बढ़ाकर इसे कैंची धाम तक ले जाने पर विचार किया जा रहा है।
प्रमुख सचिव के अनुसार, परियोजना में बदलाव के बाद इसकी स्थिति, भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़े बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि कैंची धाम पहुंचने वाले लोगों के प्रमुख मार्ग काठगोदाम-ज्योलिकोट-भीमताल और कालाढूंगी रोड से नैनीताल-ज्योलिकोट होकर भवाली की ओर जाते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि काठगोदाम और ज्योलिकोट से कैंची धाम तक रोपवे पहुंचने से पर्वतीय सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकेगा। साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परिवहन का एक दूसरा विकल्प मिलेगा। वर्तमान में ज्योलिकोट से कैंची धाम की सड़क दूरी करीब 24 किलोमीटर है। रोपवे बनने के बाद यह दूरी काफी कम हो जाएगी।
प्रस्तावित योजना में काठगोदाम रेलवे स्टेशन और रोडवेज परिसर के बीच करीब 250 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाने की योजना भी है। इसका उद्देश्य रेलवे से आने वाले यात्रियों को सीधे रोपवे स्टेशन तक पहुंचने की सुविधा देना है।
काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित रोपवे के लिए 78 टावर बनाए जाने हैं। संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र को देखते हुए चयनित स्थानों की भू-गर्भीय जांच कराने पर भी जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में पर्यावरणीय या तकनीकी कारणों से परियोजना में बाधा न आए।
मौजूदा योजना के लिए कुल 11.03 हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई गई है। इसमें 6.62 हेक्टेयर सरकारी भूमि, 3.60 हेक्टेयर वन भूमि और 0.80 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है।
रोपवे से यात्रा करने वाले लोगों को अपने वाहन पार्क करने होंगे। इसके लिए रानीबाग, काठगोदाम रेलवे स्टेशन और रोडवेज परिसर के आसपास पार्किंग विकसित करने की योजना है। बंद पड़ी एचएमटी फैक्ट्री परिसर के एक बड़े हिस्से को पार्किंग के लिए इस्तेमाल करने की संभावना भी तलाशी जा रही है। ज्योलिकोट और भवाली के आसपास भी पार्किंग की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों के सामने एक चुनौती यह भी है कि रोपवे से आने वाले पर्यटकों को हनुमानगढ़ी में उतारा जाएगा। ऐसे में वहां अचानक बढ़ने वाले यातायात और यात्रियों के दबाव को नियंत्रित करने की जरूरत होगी। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को हनुमानगढ़ी में संभावित बॉटलनेक की स्थिति से बचने के लिए पहले से व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित रोपवे एक दिशा में हर घंटे करीब 1800 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा। 10 घंटे संचालन की स्थिति में इसकी क्षमता करीब 18 हजार यात्रियों प्रतिदिन होगी। प्रति व्यक्ति किराया 375 रुपये प्रस्तावित किया गया है। अधिकारियों का अनुमान है कि रोपवे शुरू होने के बाद करीब 60 प्रतिशत यातायात इसके जरिए स्थानांतरित हो सकता है।
परियोजना को केंद्र की पर्वतमाला परियोजना में शामिल किए जाने की संभावना पर भी बैठक में चर्चा हुई। यदि इसे पर्वतमाला परियोजना का हिस्सा बनाया जाता है तो प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है और केंद्र से आर्थिक सहयोग मिलने की संभावना होगी।

