अल्मोड़ा: श्री राम सिंह धौनी राजकीय महाविद्यालय, जैती में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की छठी वर्षगांठ के अवसर पर शनिवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे शुरू हुआ और ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया गया।
गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की अवधारणा, इसके विभिन्न आयामों और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता से परिचित कराना था। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को दिए गए महत्व पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संतोष कुमार ने की, जबकि मुख्य अतिथि डॉ. सुनील पाठक रहे। मुख्य अतिथि ने भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यापक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन के साथ इसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल प्राचीन ज्ञान-संपदा के रूप में देखने के बजाय जीवन-दृष्टि, मूल्यबोध, नैतिकता, प्रकृति के साथ सामंजस्य और समग्र शिक्षा से जोड़कर समझने की जरूरत है। इस दौरान वेद, उपनिषद, भारतीय दर्शन, योग, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य, कला और लोकज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार जोशी ने किया। उन्होंने अतिथियों और उपस्थित प्राध्यापकों का स्वागत करते हुए गोष्ठी के विषय की भूमिका प्रस्तुत की।
इसके बाद डॉ. रितेश प्रसाद टम्टा ने वैदिक संस्कृत विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने वैदिक संस्कृत की विशेषताओं और भारतीय ज्ञान परंपरा में इसके महत्व के साथ ज्ञान के संरक्षण और संवहन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
डॉ. संजय कुमार ने योग विषय पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में योग के महत्व और वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर चर्चा करते हुए इसे स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. संतोष कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. पूनम आर्या ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, वक्ताओं, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का आभार जताया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. दर्शन पंत, डॉ. हेमलता ओली, डॉ. विजयलक्ष्मी, डॉ. अजय गिरी, डॉ. प्रेमा कैड़ा, डॉ. आरती सहित कर्मचारी वर्ग मौजूद रहा।
गोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृत, योग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान एवं संस्कृति की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उपयोगिता और प्रासंगिकता से परिचित कराया गया।
