नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ईंधन संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश देने के लिए ‘नो व्हीकल डे’ मनाया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता अपने आवास से पैदल ही न्यायालय पहुंचे। उनके साथ अन्य न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्ता भी पैदल चलते हुए कोर्ट पहुंचे।
इस पहल में वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह सहित कई न्यायाधीश शामिल रहे। इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल योगेश गुप्ता, अन्य रजिस्ट्रार अधिकारी और सालसा के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी भी इस अभियान का हिस्सा बने।
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मुख्य न्यायाधीश ने इस अवसर पर कहा कि ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण आज समय की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे छोटी दूरी के लिए पैदल चलने की आदत डालें, जिससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। उन्होंने इसे देशहित से जुड़ा कदम बताते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास राष्ट्र को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने भी लोगों को रोजाना पैदल चलने की सलाह दी और इसे स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा बताया।
यह पहल प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील के बाद शुरू हुए अभियान का हिस्सा है। इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी भी ‘नो व्हीकल डे’ मना चुके हैं। शासन स्तर पर भी ईंधन खपत कम करने, कार पूलिंग, साइकिलिंग और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
उच्च न्यायालय ने दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने का सुझाव भी दिया है, ताकि अनावश्यक यात्रा से बचा जा सके।
