Rasuwa [Nepal], Aug 26 (ANI): An aerial view of the houses partially submerged in mud-laden flash flood following an outburst in the Bhotekoshi River, in Rasuwa on Wednesday. (ANI Video Grab)
नई दिल्ली: नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस आपदा में कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में करीब 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
आपदा के बाद भारत और नेपाल के बीच राहत एवं बचाव को लेकर संपर्क बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर घटना पर संवेदना जताई और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजी जा रही है और एनडीआरएफ की टीमों को भी तैनात किया गया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। इससे आशंका जताई गई कि भूकंप के झटकों के कारण हिमनद में टूट-फूट हुई और उसके बाद बाढ़ आई।
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार बाढ़ से करीब सात मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। वहीं नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया कि लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई।
अधिकारियों के अनुसार भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आने से तिब्बत सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक पहुंचा और इसके बाद नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी समेत कई जिलों में तबाही का असर देखा गया।
बाढ़ के कारण कई सड़कें और पुल बह गए। नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा स्थित रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क भी बाढ़ की चपेट में आ गई।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव के लिए तैनात किया गया है। नेपाली सेना ने अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर लगाए हैं और विभिन्न स्थानों से 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
रसुवा के स्याप्रुबेसी और तिमुरे इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। राहत अभियान के लिए हेलीकॉप्टरों को भी कई स्थानों पर उतरने में परेशानी हुई। सेना ने त्रिशूली में चिकित्सा केंद्र भी स्थापित किया है।
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार नदी के अवरुद्ध होने के स्थान पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह नहीं निकला है। इसके कारण भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में खतरा अभी बना हुआ है। लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक करीब 750 लापता लोगों में लगभग 265 लोग चीन की ओर के हैं। नेपाल में लापता लोगों में करीब 133 भारतीय और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें तमिलनाडु के 37 लोग भी बताए गए हैं। कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री थे।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक लापता लोगों में अमेरिका और ब्रिटेन के पर्यटकों के अलावा मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत कई देशों के नागरिक भी शामिल हैं।
प्रलयकारी बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। रसुवागढ़ी, संजेन खोला और अपर त्रिशूली-3ए समेत कई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ में 19 मोटरेबल पुल भी बह गए।
बाढ़ का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक गिरोंग काउंटी का गिरोंग बंदरगाह प्रभावित हुआ है। शिगात्से क्षेत्र में सड़क, संचार और बिजली की लाइनें भी प्रभावित हुई हैं। बचाव अभियान के लिए सैकड़ों कर्मचारी और बड़ी संख्या में वाहन लगाए गए हैं।
नेपाल में फंसे भारतीयों और उनके परिजनों की मदद के लिए आपात संपर्क नंबर जारी किए गए हैं। नेपाल में भारतीय दूतावास के लिए +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500, जबकि बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास का नंबर 0086 185 1428 4905 दिया गया है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के लिए 1234 और 1144 तथा पर्यटन पुलिस का नंबर 9851289445 उपलब्ध कराया गया है।

