हल्द्वानी :18 सितंबर को बुद्ध पार्क में सामाजिक संगठनों, लोक कलाकारों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। लोगों ने हाथों में तख्तियां थामे, आरोपी को फांसी देने की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारी बुद्ध पार्क से एसडीएम कोर्ट की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई, हालांकि प्रदर्शनकारियों की भीड़ के आगे पुलिस बेबस नज़र आई। आखिरकार प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पीड़िता के परिवार और जनता की उम्मीदों को तोड़ता है। मासूम की निर्मम हत्या ने प्रदेशवासियों को झकझोर दिया था और सबको उम्मीद थी कि अदालत से कठोर सजा मिलेगी। लेकिन हालिया फैसला न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इस विरोध प्रदर्शन में हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश समेत लोक कलाकार श्वेता महरा, इंदर आर्य, प्रियंका मेहरा और गोविंद दिगारी जैसे कई कलाकार भी शामिल हुए।
मामले की पृष्ठभूमि : नवंबर 2014 में पिथौरागढ़ की सात वर्षीय बच्ची अपने परिवार के साथ काठगोदाम में एक शादी समारोह में आई थी। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गई। पांच दिन बाद उसका शव गौला नदी के किनारे जंगल में मिला। जांच में दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई थी। उस समय पूरे प्रदेश में जबरदस्त आक्रोश हुआ और जगह-जगह प्रदर्शन हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत करना पड़ा था।
पुलिस ने तीन आरोपियों को नामजद किया था। बाद में एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी अख्तर अली को पॉक्सो और आईपीसी की धारा 376 के तहत हाईकोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। एक अन्य आरोपी प्रेमपाल को पांच साल की सजा और जुर्माना मिला। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अख्तर अली को बरी कर दिया है।
