नैनीताल: पानी जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन ज्योलिकोट में यही पानी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। दूषित पेयजल से बीमारी के मामले सामने आने और तीन लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। दूषित पानी की सप्लाई बंद कर टैंकरों से वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की गई, लेकिन पहाड़ी इलाकों में टैंकर का पानी घरों तक पहुंचाना अब नई चुनौती बन गया है।
कई गांवों में लोगों को सड़क तक पहुंचकर पानी भरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दूर-दराज के इलाकों में कई दिनों से पानी नहीं पहुंचा है। ऐसे में ग्रामीणों को डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके घर में कोई बीमार है। परिवार के सामने मरीज की देखभाल करने के साथ पानी की व्यवस्था करने की भी मजबूरी है। पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय लोग टैंकर व्यवस्था को फिलहाल जरूरी तो मान रहे हैं, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं मानते।
टैंकर से सड़क तक पानी पहुंचने के बाद उसे घरों तक ले जाने में हो रही परेशानी को देखते हुए जल संस्थान अब वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे गांवों को चिह्नित किया जा रहा है जो सड़क से दूर हैं।
इन जगहों पर पाइप लाइन को बीच से जोड़कर टैंकर के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। कुछ गांवों में इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि कोशिश है कि दूर-दराज के गांवों में इतना पानी पहुंचाया जा सके, जिसे ग्रामीण तीन से चार दिन तक स्टोर कर सकें।
दूसरी ओर ज्योलिकोट स्थित सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल में भी पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जल संस्थान की जांच में विद्यालय की पानी की टंकियों में अस्वच्छ पानी मिला।
जांच के दौरान टंकी की सफाई में भारी मात्रा में गंदा पानी, मिट्टी और कीचड़ मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद न्यायालय उप जिलाधिकारी एवं परगना मजिस्ट्रेट, नैनीताल की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 152(1) के तहत आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
प्रशासन ने विद्यालय की संबंधित पानी की टंकियों के पानी के पेयजल के रूप में इस्तेमाल और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही टंकियों की पूरी तरह सफाई और विसंक्रमण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने स्कूल के पानी के नमूने अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने को कहा है। जब तक पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तब तक संबंधित जलस्रोत का पेयजल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए तत्काल सुरक्षित और मानकयुक्त वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि स्कूल में पानी की व्यवस्था के लिए न तो जल संस्थान का कनेक्शन था और न ही जल निगम का। स्कूल प्रबंधन की ओर से एक स्रोत से पाइप लाइन खींचकर पानी की टंकी तक पहुंचाया जा रहा था।
जब अधिकारियों ने टंकी की स्थिति देखी तो उसमें लंबे समय से सफाई नहीं होने की बात सामने आई। टंकी के अंदर गंदगी, मिट्टी और कीचड़ पाए जाने के बाद प्रशासन ने पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए सफाई और पानी की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए।
ज्योलिकोट में दूषित पानी से बीमारी के बाद अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर प्रभावित लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना और दूसरी ओर जलस्रोतों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना। स्थानीय लोगों की मांग है कि उन्हें सिर्फ पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि नियमित और साफ-सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

