नैनीताल: नैनीताल जिले के ज्योलिकोट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल को लेकर स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। क्षेत्र में पीलिया, डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार और पेट संबंधी बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ज्योलिकोट क्षेत्र में 50 से अधिक लोग पीलिया की चपेट में आ चुके हैं। कई मरीजों को हल्द्वानी, नैनीताल, बरेली और दिल्ली के अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ज्योलिकोट क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से स्वास्थ्य शिविर लगाने, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, दूषित पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। जल संस्थान की ओर से पानी के स्रोतों और टैंकों की सफाई के साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था में बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बीमारी के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता हेम आर्य हल्द्वानी पहुंचे और दूषित पानी से बीमार हुए मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
हेम आर्य ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से पेयजल की समस्या को जल्द दूर करने और प्रभावित क्षेत्रों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। बीमारी की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग दिया जाना चाहिए।
इस दौरान हेम आर्य ने अग्रवाल अस्पताल पहुंचकर देवेश पाल और उनके भाई से भी मुलाकात की और उनका हाल जाना। जानकारी के अनुसार, देवेश पाल कुछ समय पहले हुई एक दुर्घटना में घायल हुए थे।
ज्योलिकोट और आसपास के गांवों में लगातार सामने आ रहे बीमारी के मामलों के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण दूषित पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर है।

