नैनीताल: बीडी पांडे जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी अब गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। अस्पताल में तैनात एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र मेर ने प्रभारी पीएमएस को इस्तीफा सौंप दिया है। उनके जाने के बाद अस्पताल में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं बचेगा। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी रेफर करने की नौबत आ सकती है।
बीडी पांडे जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों के तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से दो पद करीब दो साल से खाली चल रहे हैं। स्थायी नियुक्ति नहीं होने के कारण अस्पताल की बाल रोग सेवाएं लंबे समय से एक ही विशेषज्ञ के भरोसे संचालित हो रही थीं।
अस्पताल में तैनात डॉ. रविंद्र मेर रोजाना करीब 40 से 50 बच्चों का उपचार कर रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद अब बच्चों के इलाज को लेकर अस्पताल प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
बारिश के मौसम में बच्चों में वायरल संक्रमण, डायरिया और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी का असर नैनीताल के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों के इलाज पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी रेफर करना पड़ सकता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त परेशानी उठाने के साथ लंबी दूरी भी तय करनी पड़ेगी।
बीडी पांडे अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति का मामला करीब एक साल पहले सांसद अजय भट्ट ने भी शासन के सामने उठाया था। उन्होंने अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति को लेकर शासन को पत्र लिखा था।
इसके बावजूद रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी। अब अस्पताल में तैनात एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ के इस्तीफे के बाद बाल रोग सेवाओं को लेकर स्थिति और गंभीर हो गई है।
प्रभारी पीएमएस डॉ. द्रोपदी गंगवार ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ की मांग शासन स्तर पर की गई है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर के जाने से अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित होंगी, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में रिक्त पदों का मामला स्वास्थ्य सचिव के सामने भी रखा गया है। अब शासन स्तर से नई नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का इंतजार है।

