नैनीताल: उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन प्रभावित कर दिया है। नैनीताल, देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर समेत कई जिलों में बारिश के कारण सड़कें बाधित हैं और नदी-नाले उफान पर हैं। अलग-अलग बारिश जनित हादसों में 12 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
बारिश के कारण कहीं भूस्खलन से सड़कें बंद हैं तो कहीं बरसाती नालों और नदियों का पानी खतरे का कारण बना हुआ है। प्रशासन और राहत-बचाव टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
नैनीताल जिले में बारिश का असर सबसे ज्यादा सड़क संपर्क पर दिखाई दे रहा है। 2 सितंबर 2026 की सुबह 9:30 बजे जारी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 47 सड़कें बाधित हैं।
इनमें 3 राज्य मार्ग, 2 मुख्य जिला मार्ग, 1 अन्य जिला मार्ग और 41 ग्रामीण मार्ग शामिल हैं। कई जगह भूस्खलन और मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है।
बंद मार्गों में गर्जिया-बेतालघाट-खैरना राज्य मार्ग-62, खनस्यू-पतलोट राज्य मार्ग-64 और काठगोदाम-सिमलियाबैड राज्य मार्ग-103 प्रमुख हैं। इसके अलावा नौकुचियाताल-जंगलीयागांव, मीना-ल्वेशाल-कालापातल, घोड़िया-हल्सो, रातीघाट-बुधलाकोट, मंगोली-थापला, पंगोट-देचौरी समेत कई ग्रामीण मार्ग भी प्रभावित हैं।
संबंधित विभागों की टीमें और मशीनरी मार्गों को खोलने में जुटी हुई हैं।
जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान कई इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। नैनीताल स्नो व्यू में 217 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं हल्द्वानी-काठगोदाम में 166 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
श्री कैंची धाम में 105 मिमी, मुक्तेश्वर और चोरगलिया में 107.7-107.7 मिमी, खनस्यू में 92.5 मिमी और बेतालघाट में 80.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।
भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग बंद होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित है।
लगातार बारिश को देखते हुए जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। सुबह 9:30 बजे तक बैराजों से दर्ज डिस्चार्ज के अनुसार गौला नदी में 18,612 क्यूसेक, कोसी नदी में 25,068 क्यूसेक और नंधौर नदी में 1,058 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।
बारिश जारी रहने के कारण पहाड़ों से आने वाला पानी अचानक बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
लगातार बारिश के बीच नैनीताल जिले के भीमताल से दर्दनाक हादसा सामने आया। 1 सितंबर को नाले के तेज बहाव में बहने से तीन वर्षीय पिहू पुत्री भुवन राम की मौत हो गई।
बच्ची के बहने के बाद परिजनों और पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। तेज बहाव के चलते बच्ची का शव घटनास्थल से दूर बरामद हुआ। प्रशासन ने घटना को दैवीय आपदा के अंतर्गत माना है और पीड़ित परिवार को राहत राशि देने की कार्रवाई की जा रही है।
नैनीताल तहसील के अल्चौना-पाण्डेछोड़ गांव में ककड़िया नाले का पानी और मलबा बढ़ने के बाद कई घरों और गौशालाओं पर खतरा मंडराने लगा।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 20 प्रभावित परिवारों को उनके मवेशियों समेत गांव के भीतर ही सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों और उनके पशुओं को सुरक्षित रखना है।
अल्मोड़ा के हवालबाग क्षेत्र के उड़यूड़ा गांव में भारी बारिश के बीच रात करीब डेढ़ बजे मकान में मलबा घुस गया। घर में सो रहे तीन लोगों की मलबे में दबने से मौत हो गई।
मृतकों की पहचान 40 वर्षीय प्रेम देवी, 19 वर्षीय कल्पना आर्य और 16 वर्षीय मनीष कुमार के रूप में हुई है। रास्ता बाधित होने के कारण शवों को मंगलवार सुबह बेस अस्पताल लाया गया।
SDRF और आपदा प्रबंधन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया। आसपास के चार से पांच मकानों पर भी खतरा बताया गया है।
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में बरसाती रपटे के तेज बहाव में एक क्रेटा कार बह गई। हादसे में दो लोगों की मौत हुई, जबकि SDRF ने एक युवती को घायल अवस्था में सुरक्षित बाहर निकाला।
SDRF ने रातभर सर्च ऑपरेशन चलाकर शवों को बरामद किया और पुलिस के सुपुर्द किया।
चमोली के थराली-देवाल मोटर मार्ग पर पहाड़ी दरकने से मलबा आने के कारण यातायात प्रभावित हुआ। वहीं मसूरी-देहरादून मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास भू-धसाव से सड़क बाधित हुई। सड़क खोलने के लिए PWD की टीम मौके पर पहुंची।
लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों से नदी, नाले, गधेरे और बरसाती रपटों के पास नहीं जाने की अपील की है। तेज बहाव वाली जगहों को पार करने का जोखिम नहीं लेने और पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि मौसम और आपदा से जुड़े हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित सड़कों को खोलने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट रखा गया है।

