नैनीताल में ईंधन संकट
नैनीताल: पर्यटन सीजन के बीच पेट्रोल और डीजल की सीमित आपूर्ति ने होटल कारोबारियों, टैक्सी संचालकों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ों में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आमद के बीच ईंधन संकट की आशंका से स्थानीय कारोबार प्रभावित होने का डर सताने लगा है।
इन दिनों नैनीताल में देश के अलग-अलग राज्यों से पर्यटक पहुंच रहे हैं। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और गुजरात से बड़ी संख्या में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए सरोवर नगरी का रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में पेट्रोल और डीजल सीमित मात्रा में मिलने की खबर सामने आने के बाद पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में बेचैनी बढ़ गई है।
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स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि पर्यटकों को पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लगानी पड़ीं या पर्याप्त ईंधन नहीं मिला, तो इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ेगा। होटल बुकिंग, टैक्सी कारोबार, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
कारोबारियों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों की पूरी अर्थव्यवस्था सड़क और परिवहन व्यवस्था पर निर्भर करती है। यहां रोजमर्रा की जरूरतों का सामान भी वाहनों के जरिए पहुंचता है और पर्यटकों की आवाजाही भी पूरी तरह परिवहन पर टिकी रहती है। ऐसे में यदि वाहनों की रफ्तार थमी तो कारोबार भी प्रभावित होना तय है।
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दिग्विजय सिंह बिष्ट ने कहा कि पर्यटन सीजन शुरू होने के बावजूद ईंधन की सीमित सप्लाई चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने वाली है, ऐसे में यदि हालात नहीं सुधरे तो इसका सीधा नुकसान पर्यटन कारोबार को होगा।
उन्होंने कहा कि होटल कारोबारी पहले ही गैस की कमी और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। कई लोग अब इलेक्ट्रिक उपकरणों और कोयले का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कमी से होटल, टैक्सी और अन्य व्यवसायों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाएगा।
व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि यदि पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर कोई नई SOP या व्यवस्था लागू की गई है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि स्पष्ट जानकारी न मिलने से लोगों के बीच भ्रम और अफवाहें फैल रही हैं, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों में चिंता बढ़ती जा रही है।
