नैनीताल: कृष्णापुर, मनौरा रेंज, बल्दियाखान, नैनागांव, पटवाडांगर और आरुखान के जंगल पिछले कई घंटों से लगातार धधक रहे हैं
नैनीताल:
शहर से सटे कृष्णापुर, मनौरा रेंज, बल्दियाखान, नैनागांव, पटवाडांगर और आरुखान के जंगल पिछले कई घंटों से लगातार धधक रहे हैं। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि अब आग रिहायशी इलाकों के बेहद करीब पहुंच गई है और लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
बीती रात कृष्णापुर क्षेत्र में अचानक जंगल से उठती आग की लपटों ने लोगों की नींद उड़ा दी। तेज हवाओं के साथ आग तेजी से फैलती गई और कुछ ही देर में घरों के नजदीक पहुंच गई। स्थानीय लोग बाल्टियों और पाइपों से पानी डालकर आग रोकने में जुट गए। बाद में फायर ब्रिगेड और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद घंटों की मशक्कत के बाद आग को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सका।
वहीं दूसरी तरफ मनौरा रेंज के जंगल करीब 70 घंटे से लगातार जल रहे हैं। रविवार को नैनागांव क्षेत्र से शुरू हुई आग धीरे-धीरे कई किलोमीटर तक फैल गई। धुएं का घना गुबार अब पूरे इलाके को ढक चुका है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगी हैं। कई गांवों में बुजुर्ग, बच्चे और दमा के मरीज सबसे ज्यादा परेशान बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में सूखी चीड़ की पत्तियां और तेज हवाएं आग को और भड़का रही हैं। कई जगहों पर आग इतनी तेजी से फैल रही है कि वन विभाग की टीमें भी उसे रोकने में संघर्ष करती नजर आ रही हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित रहीं और समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
आग की चपेट में आकर चीड़, बांज और बुरांश समेत बड़ी संख्या में वनस्पतियां जलकर राख हो रही हैं। जंगलों में रहने वाले छोटे वन्यजीव और पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भागते दिखाई दिए।
हालांकि वन विभाग, दमकल विभाग और स्थानीय लोग लगातार आग बुझाने में जुटे हुए हैं, लेकिन तेज हवाएं और बढ़ता तापमान राहत कार्यों को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से जंगलों के आसपास सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है।
