पूर्व विधायक सुरेश राठौर
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) रवि प्रकाश की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है।
अदालत ने सुरेश राठौर को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले उन्हें 14 जून को पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सुरेश राठौर शुरू से जांच में सहयोग कर रहे थे और उन्हें पहले नोटिस देकर छोड़ा भी गया था। वहीं अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुलिस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जा सकती है। अदालत ने यह भी माना कि जो अतिरिक्त धारा जोड़ी गई है, वह भी जमानती प्रकृति की है।
दरअसल, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ ऑडियो-वीडियो के बाद उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। आरोप लगाया गया कि इन सामग्रियों में भाजपा नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों के बारे में आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। इसी मामले में हरिद्वार और देहरादून के विभिन्न थानों में सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे।
विवाद तब और बढ़ गया जब वायरल सामग्री में कथित “वीआईपी” का जिक्र सामने आया। इसके बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने अंकिता के परिजनों से मुलाकात की थी और बाद में मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की घोषणा की थी।
गौरतलब है कि इस मामले में Suresh Rathore के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर में से दो को पहले ही Uttarakhand High Court द्वारा निरस्त किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों में जांच जारी है। इसी बीच अदालत से जमानत मिलने के बाद सुरेश राठौर को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है।
