नैनीताल: पहाड़ों के साफ आसमान में बुधवार रात खगोलीय घटना का शानदार नजारा देखने को मिल सकता है। इस वर्ष का पर्सीड उल्कापात 12 और 13 अगस्त की रात अपने चरम पर रहेगा। इस दौरान अनुकूल परिस्थितियों में आसमान में हर घंटे करीब 50 से 100 तक उल्काएं दिखाई दे सकती हैं।
इस बार उल्कापात देखने के लिए परिस्थितियां इसलिए भी बेहतर हैं क्योंकि अमावस्या के कारण आसमान में चंद्रमा की रोशनी नहीं होगी। इससे कम रोशनी वाले स्थानों से उल्काओं को देखने में आसानी होगी।
एरीज विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार पर्सीड उल्कापात जुलाई के मध्य से अगस्त के अंत तक सक्रिय रहता है, लेकिन इसकी गतिविधि अगस्त के मध्य में सबसे अधिक होती है।
उन्होंने बताया कि पर्सीड उल्कापात को देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन की जरूरत नहीं होती। साफ आसमान और कम कृत्रिम रोशनी वाला स्थान इसके लिए पर्याप्त है।
उल्कापात देखने के लिए मध्यरात्रि के बाद का समय बेहतर माना जाता है। कुछ घंटों तक आसमान साफ रहने पर दर्शक बिना किसी उपकरण के भी उल्काओं को देख सकते हैं।
नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में शहर की कृत्रिम रोशनी से दूर ऊंचाई वाले और खुले स्थानों से यह नजारा देखने का बेहतर मौका मिल सकता है।
पर्सीड उल्कापात का नाम पर्शियस तारामंडल के नाम पर पड़ा है। उल्काएं वास्तव में अंतरिक्ष में धूल और मलबे के छोटे कण होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के दौरान घर्षण के कारण चमकते हुए दिखाई देते हैं।
हालांकि अगस्त में मानसून के कारण बादल इस खगोलीय घटना को देखने में बाधा डाल सकते हैं। ऐसे में साफ आसमान मिलने पर ही उल्कापात का पूरा नजारा देखा जा सकेगा।
