हल्द्वानी। छात्रसंघ चुनाव में एक-एक वोट की कीमत कितनी होती है, इसका अंदाजा एमबीपीजी कॉलेज में हुए चुनाव के खर्च से लगाया जा सकता है। कॉलेज में 11 पदों के लिए मैदान में उतरे 72 प्रत्याशियों ने प्रचार और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कथित तौर पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इस हिसाब से एक वोट पर लगभग 3,700 रुपये खर्च हुए। वहीं, इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद 12,800 छात्र-छात्राओं में से केवल 4,063 ने ही मतदान किया।
चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च को लेकर सामने आए इन अनुमानों ने छात्रसंघ चुनाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लिंगदोह समिति की ओर से निर्धारित 50 हजार रुपये की खर्च सीमा के बावजूद चुनाव प्रचार में बड़े पैमाने पर धन खर्च किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, डेढ़ करोड़ रुपये का आंकड़ा अनुमान पर आधारित है।
एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव का माहौल मतदान से करीब एक महीने पहले ही बनने लगा था। चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों ने शहर के बड़े बैंक्वेट हॉल में फ्रेशर पार्टियों और गैदरिंग के आयोजन शुरू कर दिए थे। इसके बाद प्रत्याशियों के नाम तय होते ही शहर में पोस्टर, बैनर और होर्डिंग की भरमार हो गई।
अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रत्याशियों ने प्रचार पर जमकर पैसा खर्च किया। चुनावी गतिविधियां केवल कॉलेज परिसर तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि शहर के कई इलाकों में भी चुनाव प्रचार का असर दिखाई दिया।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुख पदों के दावेदारों की ओर से फ्रेशर पार्टियों से लेकर म्यूजिकल फेस्ट तक आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में प्रदेश के नामचीन कलाकारों को बुलाया गया। अनुमान के मुताबिक, केवल इन आयोजनों पर ही 60 से 65 लाख रुपये खर्च किए गए।
इसके अलावा पोस्टर, बैनर, होर्डिंग और पर्चे छपवाने में करीब पांच से सात लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। समर्थकों को फिल्म दिखाने और आशीर्वाद यात्रा के नाम पर पूर्णागिरि, हनुमान धाम और रामनगर जैसे स्थानों पर ले जाने के लिए बसों और कारों की व्यवस्था की गई। इन गतिविधियों पर भी करीब आठ से दस लाख रुपये खर्च होने की बात कही जा रही है।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की बैठकें बड़े रेस्तरां में होती रहीं। इसके साथ ही रोजाना खाने-पीने, प्रचार में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों के पेट्रोल, किराये के चुनाव कार्यालयों और अन्य व्यवस्थाओं पर भी बड़ी रकम खर्च की गई।
मतदान के दिन गौलापार, गूलरभोज, बिंदुखत्ता और ओखलकांडा समेत दूरदराज के क्षेत्रों से छात्र-छात्राओं को कॉलेज तक लाने के लिए भी वाहनों की व्यवस्था की गई। इन सभी मदों में करीब 60 से 70 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा समर्थकों को पैसे बांटने के आरोप भी लगे।
छात्रसंघ चुनाव में होने वाले खर्च का पूरा बोझ प्रत्याशियों पर ही नहीं रहता। बताया जाता है कि शहर के कुछ धनाढ्य लोग और राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्ति भी अपने समर्थित प्रत्याशियों की मदद करते हैं। चुनाव प्रचार और अन्य गतिविधियों में उनकी ओर से भी आर्थिक सहयोग दिए जाने की बात कही जाती है।
ऐसे में चुनाव में खर्च होने वाली कुल रकम का अनुमान लगाना भी आसान नहीं है। हालांकि, प्रत्याशियों के खर्च और उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के दौरान हुए भारी खर्च के बावजूद मतदान का आंकड़ा काफी कम रहा। कॉलेज में कुल 12,800 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 4,063 ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस तरह 68 फीसदी से अधिक छात्र-छात्राएं मतदान से दूर रहे।
कॉलेज की एक छात्रा ने चुनाव के दौरान डर का माहौल होने की बात कही। आवास-विकास क्षेत्र में रहने वाली यह छात्रा नियमित रूप से कॉलेज जाती हैं, लेकिन मंगलवार को मतदान करने नहीं पहुंचीं। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान कॉलेज में ऐसा माहौल रहता है, जिसमें छात्राएं असहज महसूस करती हैं।
एमबीपीजी कॉलेज में कम मतदान का मामला इस साल तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष भी महज 25 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने ही मतदान किया था। लगातार कम मतदान के बीच इस बार चुनाव प्रचार पर हुए भारी खर्च ने छात्रसंघ चुनाव की उपयोगिता को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।
छात्रसंघ चुनाव के दौरान कॉलेज परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही, मारपीट और हंगामे की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। चुनावी गतिविधियों के चलते पढ़ाई प्रभावित होने की बात भी कही जाती है। ऐसे माहौल में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का चुनाव से दूरी बनाए रखना कई सवाल खड़े करता है।
अब सवाल यह है कि जब कॉलेज के अधिकांश छात्र-छात्राएं मतदान में हिस्सा ही नहीं ले रहे हैं और चुनाव के दौरान भारी खर्च के साथ अव्यवस्था की शिकायतें भी सामने आती हैं, तो छात्रसंघ चुनाव की मौजूदा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।



