रैमजे अस्पताल में सांसद अजय भट्ट
नैनीताल: शहर का वो अस्पताल जो कभी कुमाऊं और राज्य गठन से पूर्व उत्तर प्रदेश के सबसे नामी अस्पतालों में गिना जाता था वह रैमजी अस्पताल आज कुग्रत की भेट चढ़ा हुआ है। पूरा चिकित्सालय बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा जिसे देख हर कोई दंग है. अस्पताल के बेड पर जंग लगी है। कई कार्यलायों पर ताले पड़े हुए है, और इलाज भी हर दिन भगवान भरोसे चल रहा है।
अस्पताल के परिसर में बने आवास,मेस, लौंड्री और अन्य सुविधायें भी उपेक्षा की शिकार बनी हुई है। कई भवनो के दरवाजे, खिड़किया और फर्श तक टूट चुका है। हर एक कोना अस्पताल की बदहाली बया कर रहा है। मरीजों के लिए बिस्तर पर जंग लगा हुआ है, क्योंकि उनका सालो से उपयोग नहीं हुआ है। वर्तमान में अस्पताल में पांच नर्सिंग कर्मचारी और दो फार्मसिस्ट और एक चिकित्सक को तैनात दर्शाया गया है, और एकमात्र चिकित्सक भी पीजी डिग्री की पढ़ाई करने के लिए लम्बी लिए हुए है।
शुक्रवार को क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट अचानक अस्पताल निरीक्षण के लिए पहुचे। निरीक्षण के दौरान उन्हें अस्पताल में ना तो कोई डॉक्टर मिले ना कोई मरीज। काफी देर बाद एक नर्स वहां पहुंची और बताया कि अस्पताल में कोई इलाज को व्यवस्था नहीं है। और अब भवन का उपयोग कभी कभी फिल्मों और वेब सीरीज की सूटिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
अस्पताल की यह स्थिति देख सांसद भट्ट कड़ी नाराज़गी जताई और तत्काल स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से फोन पर सम्पर्क कर अस्पताल के पुनरुद्धार के लिए समिति का गठन करने का आग्रह किया।
सांसद भट्ट ने कहा यह उत्तराखंड के इतिहास का बड़ा हीं प्रतिष्ठित चिकित्सालय है और इसको पुनः विकसित करने के लिए केंद्र सरकार से भी मदद लेनी पड़े तो बिना संकोच के लिए प्रस्ताव दिया जायेगा।
बता दें ब्रिटिश शासन में बना यह रैमजे हॉस्पिटल जिससे बाद में जी बी पंत अस्पताल से जाने जाना लगा, यह कभी देश भर में प्रसिद्ध था, यहाँ तैनात बड़े बड़े सर्जन, और चिकित्स्कों के कारण यह अस्पताल अपने समय में लोगों का भरोसेमंद अस्पताल बना रहा है, और कई मरीजों की जटिल बीमारी के सफल उपचार के लिए प्रसिद्ध रहा। लेकिन समय के साथ यहाँ भी संसाधनों की कमी से और सरकार की अनदेखी ने आज इससे निर्ष्क्रिय बना दिया है।
रैमजे में वर्तमान में एक डायलसिस सुविधा दुरुस्त है जो कि हँस फाउंडेशन की तरफ से उपलब्ध है।
