कमस्यार घाटी में सड़क के लिए 5 किमी मानव श्रृंखला.
पिथौरागढ़: जिले की कमस्यार घाटी में सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। बेरीनाग से पोसा-पोस्ताला होते हुए कमस्यार घाटी को जोड़ने वाले मार्ग के डामरीकरण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 23 अगस्त को करीब पांच किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई। बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी सड़क पर उतरे और वर्षों से लंबित मांग को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क का कटान करीब 24 वर्ष पहले किया गया था, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी मार्ग पर डामरीकरण का काम पूरा नहीं हो सका है। कच्चे और बदहाल मार्ग के कारण क्षेत्रवासियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति के चलते इस मार्ग पर कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और हादसों में लोगों की जान भी जा चुकी है।
24 साल बाद भी सड़क की स्थिति जस की तस
कमस्यार घाटी के ग्रामीणों के लिए सड़क महज आवागमन का साधन नहीं है। यह क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दैनिक जरूरतों से सीधे जुड़ा मुद्दा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर बच्चों और स्थानीय लोगों के आवागमन तक में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क के डामरीकरण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन संबंधित विभागों और शासन स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद धरातल पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।

पांच किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर जताया विरोध
अपनी मांग को शासन तक पहुंचाने के लिए क्षेत्रवासियों ने 23 अगस्त को शांतिपूर्ण तरीके से करीब पांच किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए और सड़क के डामरीकरण की मांग को लेकर आवाज उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि क्षेत्र की मूलभूत समस्या को लेकर किया गया। उनका उद्देश्य शासन-प्रशासन का ध्यान सड़क की बदहाल स्थिति की ओर आकर्षित करना है।

सूचना के बावजूद अधिकारी नहीं पहुंचे
ग्रामीणों के अनुसार, मानव श्रृंखला और विरोध प्रदर्शन की सूचना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों को पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शन स्थल पर ग्रामीणों की समस्या सुनने के लिए किसी जिम्मेदार अधिकारी के पहुंचने की बात सामने नहीं आई।
इससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि उनकी समस्या को गंभीरता से सुना जाता और मौके पर संबंधित अधिकारी पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते तो उन्हें शासन-प्रशासन से संवाद का भरोसा मिलता।
अब आंदोलन तेज करने की तैयारी
24 वर्षों से सड़क के इंतजार के बाद ग्रामीणों का कहना है कि अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है। क्षेत्रवासियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांग पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव में चुनाव बहिष्कार का निर्णय लेने की चेतावनी भी दी है। वहीं, कुछ ग्रामीणों की ओर से कुलूर नदी में जलसमाधि लेने जैसी गंभीर चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है। प्रशासन के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय हो सकती है।
कमस्यार घाटी के ग्रामीणों की मांग अब केवल स्थानीय स्तर के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गई है। 24 वर्षों से लंबित सड़क के डामरीकरण का मुद्दा शासन-प्रशासन के सामने एक बार फिर प्रमुखता से उठा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों के विकास में सड़क सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत जरूरतों में से एक है। ऐसे में वर्षों से लंबित सड़क का काम पूरा होना क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए राहत का बड़ा कदम होगा।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों के इस आंदोलन के बाद शासन और संबंधित विभाग सड़क के डामरीकरण को लेकर क्या कदम उठाते हैं और 24 वर्षों से सड़क का इंतजार कर रही कमस्यार घाटी को कब तक पक्की सड़क की सुविधा मिल पाती है।

