नैनीताल: आम लोगों को तहसील कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत देने के लिए नैनीताल जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनपद के सभी जिला स्तरीय अधिकारियों, उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड सरकार के अधिकृत ई-भूलेख पोर्टल से आम नागरिकों द्वारा स्वयं डाउनलोड की गई कम्प्यूटरीकृत खतौनी को स्वीकार किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर ऑनलाइन प्राप्त खतौनी को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि संबंधित व्यक्ति ने उसे स्वयं पोर्टल से डाउनलोड किया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य में भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण की व्यवस्था लागू है और सभी तहसीलों से कम्प्यूटरीकृत खतौनी की प्रतियां जारी की जा रही हैं। आम नागरिक निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करने के बाद ई-भूलेख पोर्टल से अपनी खतौनी प्राप्त या डाउनलोड कर सकते हैं।
इसके बावजूद प्रशासन के संज्ञान में आया था कि कुछ विभागीय कार्यालय ऑनलाइन डाउनलोड की गई खतौनी को स्वीकार नहीं कर रहे थे। संबंधित लोगों को दोबारा तहसील कार्यालय जाकर उसी खतौनी की प्रति प्राप्त करने के लिए कहा जा रहा था।
डीएम ने इसे आम जनता के लिए अनावश्यक परेशानी बताते हुए अधिकारियों को इस व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार, यदि ऑनलाइन प्राप्त खतौनी में दर्ज विवरण पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेख से मिलान योग्य है तो उसे केवल ऑनलाइन डाउनलोड किए जाने के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसी विभाग को भूमि संबंधी खतौनी की आवश्यकता होने पर संबंधित व्यक्ति को उसी दस्तावेज की प्रमाणित प्रति लेने के लिए दोबारा तहसील कार्यालय भेजने से भी बचने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, यदि किसी विशेष सेवा या प्रकरण में किसी अधिनियम, नियम, शासनादेश या सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत प्रमाणित प्रति अथवा मूल अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य है, तो उस स्थिति में संबंधित नियमों के अनुसार दस्तावेज मांगा जा सकेगा।
डीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि यदि ऑनलाइन प्राप्त खतौनी में नाम, खाता संख्या, खसरा संख्या या अन्य विवरण को लेकर कोई संदेह या अभिलेखीय विसंगति सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति को अनावश्यक रूप से तहसील भेजने के बजाय पहले ई-भूलेख पोर्टल पर रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए।
जरूरत पड़ने पर विभागीय स्तर पर संबंधित तहसील या अन्य विभाग से समन्वय कर रिकॉर्ड की पुष्टि करने को कहा गया है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आम नागरिकों को केवल ऑनलाइन डाउनलोड की गई खतौनी के कारण उसी दस्तावेज की दूसरी प्रति लेने के लिए तहसील कार्यालय जाने को मजबूर न किया जाए।
प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकारी सेवाओं में डिजिटल दस्तावेजों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और लोगों का समय, श्रम और अनावश्यक कार्यालयी चक्कर भी कम होंगे।

