उत्तराखंड हाईकोर्ट (नैनीताल)
नैनीताल: ज्यूलिकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल पीने से लोगों की मौत के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए अलग-अलग स्थानों से सैंपल लेने के साथ ही कुमाऊं क्षेत्र में प्रस्तावित टेस्टिंग लैब को लेकर जल्द निर्णय लेने को कहा है।
मंगलवार को वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ रश्मि पंत, जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों को कोर्ट के सामने पक्ष रखना पड़ा। याचिकाकर्ता अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से 10 से अधिक मेडिकल रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गईं, जिनमें मरीजों से जुड़ी लिवर संबंधी रिपोर्ट का उल्लेख किया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 21वीं सदी में ऐसी स्थिति ठीक नहीं है। कोर्ट ने अधिकारियों को निजी टेस्टिंग लैब से भी पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। न्यायालय ने जिलाधिकारी से मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की योजना को लेकर भी जानकारी मांगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकारी अस्पतालों में किसी बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाने में किसी तरह का संकोच नहीं होना चाहिए।
न्यायालय ने जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी स्थिति में सीवर का पानी पेयजल में न मिले। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि सीवर और पेयजल के मिश्रण की स्थिति पहले से सामने आ रही थी तो समय रहते जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए। प्रभावित लोगों तक टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी पहुंचाने के निर्देश भी जिलाधिकारी को दिए गए हैं। इसके अलावा नैनीताल शहर में भी पानी की जांच और सीवर लीकेज की शिकायतों की जांच कराने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए 20 से 25 अलग-अलग स्थानों से सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश में बताया गया कि जिलाधिकारी की ओर से मरीजों के निजी टेस्ट के लिए चार लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इस राशि को बढ़ाया जा सकता है। न्यायालय ने नैनीताल में सीवर लीकेज से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए जिलाधिकारी को हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “बीमारी आपने दी है, इलाज भी आप कराएंगे।”
सीएमओ रश्मि पंत ने न्यायालय को बताया कि बीमारी की वजह दूषित पानी है। उन्होंने कहा कि मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया जाएगा और प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जांच कर सरकारी अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
जिलाधिकारी की ओर से एलाइजा टेस्ट के लिए भी धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सीएमओ ने बताया कि प्रभावित सात गांवों में मेडिकल टीमें तैनात हैं। घर-घर क्लोरीन टैबलेट और ओआरएस का घोल वितरित किया जाएगा। मौके पर कुल आठ डॉक्टर और एक एंबुलेंस भी तैनात की गई है।
सुनवाई के दौरान जल संस्थान की ओर से बताया गया कि पानी की जांच स्रोत से शुरू कराई गई है और क्लोरीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग के अनुसार क्लोरीन से पानी में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म किया जाता है।
जल संस्थान ने यह भी बताया कि कुमाऊं में टेस्टिंग लैब स्थापित करने के लिए वर्ष 2022 और 15 जनवरी 2026 को सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। विभाग ने कोर्ट से इस मामले में सचिव स्तर पर धनराशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।
जल संस्थान के अनुसार पहली बार 11 मार्च को पानी का सैंपल लिया गया था, जिसमें किसी तरह का कंटेमिनेशन नहीं पाया गया था। विभाग ने स्थानीय धारों में सीवर के पानी के मिश्रण की बात भी कही।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता रवि बिष्ट ने कोर्ट को बताया कि गांव के पीएचसी सेंटर में एक दिन में 85 और अगले दिन सुबह तक 25 लोगों ने बीमारी की जांच के लिए ओपीडी कराई। वहीं, जिलाधिकारी ने न्यायालय को बताया कि जांच के दौरान पुराने कूड़ा खड्ड के समीप स्रोत और सीवर का पानी एक साथ बहता हुआ पाया गया है। डीएम के अनुसार इसी वजह से लोगों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
हाईकोर्ट ने टेस्टिंग लैब की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने क्षेत्रीय अधिकारी, जिला नैनीताल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पानी के सैंपल लेने और छह दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे महामारी की स्थिति बताते हुए जिलाधिकारी को राहत और बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

