नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि यहां के धार्मिक और पौराणिक स्थलों के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं आस्था के केंद्रों में एक नाम है नैनीताल की ठंडी सड़क पर स्थित मां पाषाण देवी मंदिर का है। नैनी झील के शांत किनारे और पहाड़ी की गोद में बसे इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। कहा जाता है कि यहां मिलने वाला अभिमंत्रित जल कई तरह के त्वचा रोगों और अन्य शारीरिक समस्याओं में लाभ पहुंचाता है, जिसके चलते दूर दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
पाषाण देवी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मां भगवती के नौ स्वरूपों का प्राकृतिक रूप से दर्शन होता है। मंदिर में स्थापित नौ पिंडियों को देवी के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है।
यहां मंदिर के पुजारी जगदीश भट्ट ने बताया कि रोजाना सुबह पूजा पाठ के दौरान मां की पिंडियों का शंख के जल को विधिवत मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाता है। श्रद्धालु इसी जल को प्रसाद स्वरूप अपने साथ लेकर जाते है। लोगो का विश्वास है कि इस जल के इस्तेमाल से त्वचा संबंधी रोगों , सफेद दाग, हकलाहट तथा तथा हाथ पैरों और जोड़ों की सूजन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
आस्था का यह सिलसिला केवल नैनीताल तक सीमित नहीं है। दिल्ली मुंबई चंडीगढ़ लखनऊ और अन्य शहरों से भी लोग विशेष रूप से इस मंदिर में पहुंचते है। कई श्रद्धालु वर्षों से यहां आकर अभिमंत्रित जल प्राप्त करते है और उसे अपनी धार्मिक आस्था का हिस्सा मानते है।
यहां के पुजारी का कहना है कि इस जल की मांग अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। अब हर दस दिन के अंतराल पर शुभ तिथि और एक वार को तय कर जल निकालते है। महीने में तीन दिन यह जल निकाला जाता है करीब 20 से 25 लीटर अभिमंत्रित जल तैयार किया जाता है, जिसे भक्तों में वितरित किया जाता है।
नैनीताल घूमने आने वालों के लिए भी मां पाषाण देवी मंदिर एक प्रमुख आकर्षण है।
