हरिद्वार: देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर सार्वजनिक जगहों पर नृत्य करने की प्रवृत्ति को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (निरंजनी) ने सख्त रुख अपनाया है। परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा है कि आगामी नवरात्र में मां दुर्गा या मां काली का स्वरूप धारण कर नृत्य करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि नवरात्र शक्ति की आराधना, साधना और सनातन आस्था का पर्व है। ऐसे में देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर सार्वजनिक रूप से नृत्य करना धार्मिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद पहले भी इस तरह के मामलों को लेकर चेतावनी दे चुकी है। कांवड़ यात्रा के दौरान भी देवी-देवताओं के स्वरूप में नृत्य करने की घटनाएं सामने आई थीं। परिषद ने ऐसे कृत्यों को अशोभनीय बताते हुए नवरात्र के दौरान भी इस पर नजर रखने की बात कही है।
श्रीमहंत ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था, संस्कार और आध्यात्मिक परंपराओं की विरासत है। उनके अनुसार देवी-देवताओं के स्वरूप श्रद्धा और साधना के केंद्र हैं, इसलिए उन्हें मनोरंजन या प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नवरात्र के दौरान धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और देवी स्वरूप की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। यदि इस दौरान कोई व्यक्ति देवी का स्वरूप धारण कर नृत्य करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अखाड़ा परिषद ने मंदिरों, धार्मिक संस्थाओं और आयोजकों से इस निर्णय में सहयोग करने की अपील की है। साथ ही श्रद्धालुओं से नवरात्र पर्व की मर्यादा, आस्था और सनातन परंपराओं का सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया गया है।

