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उत्तराखंड: उत्तर भारत में नौतपा की शुरुआत हो गई है। इस दौरान हवाओं का दौर तेज हो गया है। कई जगहों पर तापमान इतना अधिक बढ़ गया है कि बच्चे सबसे जल्दी इसकी चपेट में बच्चे आ रहे है। इसको लेकर डॉक्टर्स का कहना है कि यह मौसम छोटे बच्चो के लिए अधिक मुश्किल होता है, क्योंकि उनका शरीर गर्मी को सहने लायक मजबूत नहीं होता है। अब ऐसे में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। बच्चों को डिहाइड्रेशन तेज बुखार और हीट स्ट्रोक जैसी परेशानियां तत्काल दिखने लगती है।
वही दोपहर के समय तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है और तेज गर्म हवाएं चलने लगती है। जिसकी वजह से बच्चों को 11 बजे से 4 बजे के बीच बाहर नहीं चाहिए। जैसे ही स्कूल से घर आते ही बच्चों को आराम दीजिए। ताकि उनके शरीर का तापमान सामान्य रहे। अगर किसी मजबूरी में बाहर जाना हो तो बच्चों के शरीर में एकदम धूप लगती है तो ऐसे में आप उनके सिर में कपड़ा रखे और पानी पिलाते रहे , नारियल पानी,ors, नींबू पानी जैसे ड्रिंक्स को पिलाते रहे। जिससे उन्हें गर्मी भी कम लगेगी और शरीर में पानी की कमी भी पूरी होगी। गर्मी के समय ज्यादा कोल्ड ड्रिंक या मीठे पेय पदार्थ पीना भी अच्छा नहीं माना जाता। साथ ही तरबूज खरबूजखीरा बच्चों को खिलाए।
इसके साथ ही कपड़े भी बच्चों की सेहत पर असर डालते है सूती और हल्के कपड़े शरीर को सांस लेने देते है और पसीना भी जल्दी सूख जाता है। गहरे रंग टाइट कपड़े नहीं पहनाए।
खाने पीने में हल्का और ताजा भोजन दे। दही छाछ और मौसमी फलों को देना चाहिए। मसालेदार या तला या भुना भोजन ना ही दे या कम दे। सबसे जरूरी बात यह है कि माता पिता बच्चों में हिट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत पहचाना सीखे। यदि बच्चा कमजोर दिखे चक्कर आए लगातार पसीना निकले, तेज बुखार या मुंह सूखने लगे तो यह लूं लगने का पहला संकेत है। ऐसे में तत्काल बच्चों को ठंडी जगह पर के जाए, शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें और देर किए बिना डॉक्टर से सम्पर्क करे।
गर्मी दौर बच्चों के लिए काफी मुश्किल भरा होता है,लेकिन थोड़ी सी सतर्कता और देखभाल उन्हें इस मौसम में सुरक्षित रख सकती है। माता पिता अगर पानी, कपड़े, खान पान और धूप से बचाव जैसे छोटे कदम रोजमर्रा की आदत में शामिल कर ले तो आप बच्चों को बिना परेशानी इस मौसम को निकाल सकते हैं।
