नैनीताल: कुमाऊं विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग की एक छात्रा के असाइनमेंट और आंतरिक मूल्यांकन अंकों से जुड़ा मामला अब जांच के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय के उपलब्ध अभिलेखों में असाइनमेंट जमा करने की तारीख, अंक भेजे जाने और उन्हें पोर्टल पर अपडेट करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। मामले में विश्वविद्यालय ने छात्रा के भविष्य को देखते हुए उसकी अंकतालिका संशोधित कर दी है, जबकि प्रक्रियागत चूक की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है।
वहीं, कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने कहा है कि मामले की मूल घटनाएं फरवरी 2023 की हैं, जबकि उन्होंने 21 जुलाई 2023 को कुलपति पद का कार्यभार संभाला था। उनका कहना है कि अब इस पुराने प्रकरण को उनके निजी जीवन और चरित्र से जोड़कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग राज्यपाल एवं कुलाधिपति से की है।
विश्वविद्यालय के अनुसार भू-विज्ञान विभाग में छात्रा के असाइनमेंट जमा करने की अंतिम तिथि 25 फरवरी 2023 निर्धारित थी। इसी दिन छात्रा ने संबंधित शिक्षक को व्हाट्सऐप संदेश भेजकर बताया कि वह रामनगर में है और अगले दिन उसका जन्मदिन है। छात्रा ने 28 फरवरी को असाइनमेंट जमा करने की बात कही थी।
हालांकि 28 फरवरी को असाइनमेंट जमा हुआ या नहीं, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध नहीं है। इसके बाद 24 अप्रैल 2023 को छात्रा ने शिक्षक से दोबारा पूछा कि क्या वह अब असाइनमेंट जमा कर सकती है। यानी निर्धारित समय के करीब दो महीने बाद भी असाइनमेंट जमा किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार आरटीआई में भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष की ओर से 24 अप्रैल 2023 को लॉगबुक प्रविष्टि के आधार पर अंक भेजे जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि विश्वविद्यालय का कहना है कि उसी तारीख की लॉगबुक एंट्री में अंक भेजे जाने का उल्लेख नहीं मिलता।
28 अप्रैल 2023 को विश्वविद्यालय की ओर से सभी विभागों को पोर्टल पर अंक अपलोड करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था, लेकिन छात्रा के अंक पोर्टल पर अपडेट नहीं किए गए। इसके बाद 27 मई 2023 को एमएससी जियोलॉजी प्रथम सेमेस्टर का परिणाम घोषित हुआ।
आरटीआई के अनुसार 15 जुलाई 2023 को विभाग ने प्यून बुक प्रविष्टि के आधार पर दोबारा अंक भेजे जाने की बात कही। विश्वविद्यालय का कहना है कि निर्धारित समय के बाद असाइनमेंट स्वीकार करने और अंक भेजने के लिए परीक्षा नियंत्रक की अनुमति तथा निर्धारित विलंब शुल्क की प्रक्रिया होती है, लेकिन विभाग की ओर से इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
विश्वविद्यालय के मुताबिक 5 अप्रैल 2024 को विभागाध्यक्ष की ओर से फिर अंक भेजे जाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि संबंधित डायरी प्रविष्टि प्रश्नपत्र अनुभाग में भेजे जाने के कारण उसके छात्रा के आंतरिक अंकों से संबंधित होने पर भी सवाल खड़े हुए।
इसके बाद 21 मई 2025 को छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक को पत्र देकर अंकतालिका में असाइनमेंट के अंक नहीं जुड़ने की शिकायत की। विश्वविद्यालय के अनुसार विभागाध्यक्ष ने यह पत्र पहली बार 25 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय को भेजा।
मामला परीक्षा समिति के सामने रखा गया, जहां छात्रा का अनुरोध स्वीकार नहीं हुआ।
13 जुलाई 2026 को छात्रा परीक्षा शाखा पहुंची और बाद में कुलपति से भी मुलाकात की। विश्वविद्यालय के अनुसार छात्रा से उसके दावे के समर्थन में दस्तावेज मांगे गए, लेकिन उसके पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
इसके बावजूद छात्रहित और छात्रा के भविष्य को देखते हुए कुलपति ने उप परीक्षा नियंत्रक को विभागाध्यक्ष से विस्तृत रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए। 14 जुलाई को रिपोर्ट के लिए पत्र भेजा गया और 23 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
उपलब्ध तथ्यों और 13 जुलाई को विभाग से प्राप्त अंकों के आधार पर 30 जुलाई 2026 को प्रकरण को समाधान पखवाड़े में निस्तारित करते हुए छात्रा की अंकतालिका संशोधित कर दी गई। विश्वविद्यालय के अनुसार छात्रा को बाद में संशोधित मूल अंकतालिका और उपाधि भी प्राप्त हो गई।
विश्वविद्यालय का कहना है कि अंकतालिका में संशोधन किसी प्रक्रियागत चूक को सही ठहराने के लिए नहीं किया गया, बल्कि छात्रा के भविष्य को प्रभावित होने से बचाने के लिए मानवीय और छात्रहितकारी दृष्टिकोण अपनाया गया।
साथ ही विश्वविद्यालय ने माना कि विद्यार्थी हित में समय पर कार्रवाई नहीं किया जाना प्रशासनिक अक्षमता का विषय है। इसी कारण मामले में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो यह देखेगी कि असाइनमेंट, आंतरिक अंकों और उन्हें विश्वविद्यालय तक भेजने की प्रक्रिया में कहां चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने कहा कि उन्होंने 21 जुलाई 2023 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था, जबकि मूल घटनाक्रम फरवरी 2023 का है।
उनके अनुसार व्हाट्सऐप चैट से मामले की तारीखों और बातचीत को समझने में मदद मिली है। कुलपति ने आरोप लगाया कि पुराने मामले को अब उनके निजी जीवन और चरित्र से जोड़कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी तस्वीरों को एआई के माध्यम से जनरेट या डिजिटल रूप से मॉडिफाई कर इस्तेमाल किया गया है। प्रो. रावत ने बताया कि उन्हें 31 अगस्त को रिलीव किया जा रहा है।
कुलपति ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामले में कौन-कौन लोग शामिल रहे और किस स्तर पर प्रक्रियागत चूक हुई।

