उत्तरकाशी। दयारा ट्रेक से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई बबीता पांडे की तलाश लगातार छठे दिन भी जारी रही, लेकिन खोजी टीमों को अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। बुधवार को विशेष डीप डाइव टीम ने गोई क्षेत्र के तालाब में गहन खोजबीन की, मगर वहां भी बबीता का कोई सुराग नहीं मिला।
लापता बबीता पांडे, जो नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र की निवासी हैं, बीते 30 मई की रात गोई कैंप से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसओजी, आईटीबीपी और सेना की संयुक्त टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
खोज अभियान के दौरान गोई छानियों के पास स्थित तालाब पर विशेष फोकस किया गया। एसडीआरएफ, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की डीप डाइव टीम ने गोताखोरों और बोट की मदद से तालाब की तलाशी ली, लेकिन बबीता का कोई पता नहीं चल पाया।
लगातार कई दिनों तक चले अभियान के बावजूद कोई सफलता न मिलने पर एनडीआरएफ ने अपने खोजी कुत्ते बन्नी और ब्राउन को वापस बुला लिया है। इससे पहले ये खोजी कुत्ते जंगलों और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन में लगे हुए थे।
जिला प्रशासन की मांग पर सेना और आईटीबीपी की टीमों को भी सर्च ऑपरेशन में शामिल किया गया। ड्रोन कैमरों की मदद से जंगलों, गाड-गदेरों, पहाड़ी ढलानों और दुर्गम इलाकों की निगरानी की गई, लेकिन अब तक कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा है।
अब पुलिस घटना वाले दिन दयारा ट्रेक और गोई कैंप क्षेत्र में मौजूद पर्यटकों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि किसी पर्यटक ने बबीता को आखिरी बार देखा हो या कोई महत्वपूर्ण जानकारी दी हो, जिससे जांच को नई दिशा मिल सके।
सर्च ऑपरेशन के दौरान टीम को जंगल में दो भालुओं के संघर्ष के प्रमाण मिले हैं। घटनास्थल के आसपास खून और बाल भी बरामद हुए हैं। हालांकि इसका बबीता पांडे के लापता होने से कोई सीधा संबंध अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है।
फिलहाल प्रशासन और राहत एजेंसियां हर संभावित क्षेत्र में तलाश जारी रखे हुए हैं, जबकि बबीता के परिजन उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
